हिंदी भाषा के उत्थान के लिए केंद्र की पहल पर केजरीवाल सरकार का अपने अंदाज़ में जवाब.. अब दिल्ली में प्रोत्साहन मिलेगा इस भाषा को

राष्ट्र भाषा हिंदी को फिर से उत्थान दिलाने के लिए जो प्रयास केंद्र सरकार ने शुरू किये हैं पहले उसके खिलाफ बयानबाजी दक्षिण भारत के कुछ नेताओं की तरफ से आई थी लेकिन अब खुद हिंदी भाषी क्षेत्रों में उसका परोक्ष विरोध शुरू हो गया है और सीधे सीधे न कह कर अब कुछ कार्यों के माध्यम से ये जताने की कोशिश हो रही है कि कही न कहीं वो केंद्र सरकार के प्रयासों और पहल से सहमत नहीं हैं . इसी कर्म में शुरूआत हुई है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तरफ से .

दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आने वाली उर्दू अकादमी अब IAS की तैयारी करवाएगी . कहना गलत नहीं होगा कि उर्दू भाषी अधिकतर छात्र मुस्लिम समुदाय से होते हैं और उन्हें अब IAS में जाने के लिए दिल्ली सरकार की उर्दू अकादमी प्रोत्साहित करेगी . इसी उर्दू आकादमी के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद आम आदमी पार्टी में नम्बर 2 की हैसियत रखने वाले मनीष सिसोदिया ने कहा कि जिस तरह से अंग्रेजी और हिंदी को शिक्षण और अध्ययन की एक मानक भाषा के रूप में माना जाता है, उर्दू को भी समान माना जाएगा.

अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में चल रही दिल्ली सरकार अब उर्दू-माध्यम के छात्रों के लिए कोचिंग सुविधाओं के साथ-साथ उर्दू में सामग्री प्रदान करने के लिए आधारभूत संरचना तैयार कर रही है, जिसका अनुवाद अन्य भाषाओं से किया जा सकता है। सिसोदिया की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान और महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ एजुकेशन के छात्रों को सम्मानित किया गया.

 

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