नक्सलियों की करतूतों से वामपंथी भी दुखी.. त्रिपुरा के नामी वामपंथी नेता बिश्वजीत दत्ता ने ओढ़ लिया भगवा

वामपंथ के तेजी से विकृत हो रहे स्वरूप को देख कर अब पुराने वामपंथी भी उस राह से विमुख हो रहे है जो लेनिन , चे ग्वेरा , फिदेल कास्त्रो या कार्ल्माक्स को मानती है जबकि भारत में साक्षात देवताओं ने अवतार लिए थे . ज्ञात हो कि पिछले दिनों भारत के लोकप्रिय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी की हत्या की साजिश में जिस प्रकार से पहले तो वामपंथी गिरफ्तार किये गये वो किसी भी इंसान तो दूर , किसी भी देश तक को हिला कर रख देने के लिए काफी है . लेकिन उस से भी ज्यादा पीड़ादायक एक आम इन्सान के लिए वो अनुभव रहा जब इन दोषियों के खिलाफ कड़ी सज़ा मांगने के बजाय उन्ही वामपंथियो को महिमामंडित किया जाने लगा . 

विदित हो कि जहाँ एक तरफ त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के बत्तख के बयान का मज़ाक बना कर उड़ाया जा रहा था वहीँ उन्होंने इन आलोचनाओं पर ध्यान दिए बिना अपने लक्ष्य को दिमाग में रखा और आखिरकार वो वामपंथ का एक बड़ा किला ढहाने में कामयाब रहे ..विदित हो कि एक बेहद बड़े राजनैतिक उठापटक में त्रिपुरा में सीपीएम को तगड़ा झटका लगा है. पूर्व विधायक बिश्वजीत दत्ता सत्तारूढ़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं. दत्ता (68) राज्य की राजधानी से लगभग 50 किलोमीटर दूर खोवाई जिले में बीजेपी में शुक्रवार की शाम को शामिल हुए. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और त्रिपुरा के प्रभारी सुनील देवधर ने उनका स्वागत किया.

कम्युनिस्ट पार्टी की पूर्वोत्तर में रीढ़ माने जाने वाले नेता 1964 से सीपीएम के साथ जुड़े रहे दत्ता ने दावा किया कि राज्य में 18 फरवरी को विधानसभा चुनाव से पहले ही उनके खिलाफ ‘आपराधिक षडयंत्र’ किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्ट पार्टी भ्रष्टाचार, गुटबाजी और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है. त्रिपुरा लेफ्ट फ्रंट कमेटी ने उन्हें इस वर्ष होने वाले चुनाव में उम्मीदवार घोषित किया था. बाद में उनका पत्ता काटकर भूतपूर्व एसएफआई नेता निर्मल बिस्वास को दे दिया गया. दत्ता ने अपनी ही पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा, “मेरे खिलाफ बहुत ही आपराधिक षड़यंत्र रचा गया. मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा ताकि मैं चुनाव न लड़ सकूं. इस पूरे षड़यंत्र को सीपीआईएम के समर्थन से रचा गया.” इस परिवर्तन के बाद त्रिपुरा में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हुई है और तमाम अन्य छोटे वामपंथी नेताओं के भाजपा में आने की संभावना जताई जा रही है . साथ ही ये २०१९ के चुनावों के लिए भाजपा का पूर्वोत्तर में खेला गया एक मास्टरस्ट्रोक भी माना जा रहा है . 

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