6 राज्य और 17 बड़े कांग्रेसी रंग चुके हैं भगवा रंग में.. आखिर कांग्रेस में क्यों मची है ये भगदड़?

देश में लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. सत्तापक्ष तथा विपक्ष दोनों तरफ के योद्धाओं ने राजनीति के मैदान में मोर्चा संभाल लिया है. एकतरफ कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल प्रधानमन्त्री मोदी तथा बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का दम भर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी जी तथा बीजेपी दोबारा सत्ता में आने के लिए पूरा दमखम झोंक रहे हैं. कांग्रेस को इस बात का अंदाजा है कि मोदी के विजय रथ को रोकना आसान नहीं है, इसलिए राहुल गांधी की मदद के लिए प्रियंका वाड्रा को लाया गया है, लेकिन कांग्रेस की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं.

एकतरफ कांग्रेस महागठबंधन की कवायद में जुटी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ खुद उसके ही कद्दावर नेता पार्टी छोडकर बीजेपी से जुड़ते जा रहे हैं. लोकसभा चुनाव के दंगल का नगाड़ा बजते ही कांग्रेस के खेमे में भागम भाग मच गई है. राहुल गांधी के हाथ का साथ छोड़कर एक के बाद एक नेता जा रहे हैं. उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. अब तक 6 राज्यों में 17 बड़े नेता कांग्रेस का साथ छोड़कर भगवा ब्रिगेड में शामिल हो गए हैं. इनके अलावा कई और छोटे नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. अटकलें हैं कि आने वाले दिनों कई पुराने कांग्रेसी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

कांग्रेस के लिए ये काफी परेशान करने वाली स्थिति है कि एक तरफ जहां पार्टी आलाकमान चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन संग जोड़-तोड़ में लगा है, वहीं उसके अनुभवी नेता टूट-टूटकर अलग हो रहे हैं. कांग्रेस छोड़ने वालों में सबसे बड़ा नाम हैं सोनिया गांधी के करीबी टॉम वडक्कन. 14 अप्रैल को कांग्रेस पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता रहे टॉम वडक्कन ने बीजेपी से नाता जोड़ लिया और हवाला दिया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा भारत की जांबाज सेना के अपमान से वो आहत थे.

कांग्रेस ने अपने नेताओं में जोश भरने के लिए ही प्रियंका वाड्रा को मैदान में उतारा था. इसके बाद प्रियंका वाड्रा पीएम मोदी को हराने के लिए जनता का साथ मांग रही हैं लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं का साथ नहीं देना इस बात का इशारा माना जा रहा है कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है. इसमें सबसे चौंकाने वाली घटना टॉम वडक्कन का बीजेपी में शामिल होना रहा है. टॉम वडक्कन UPA अध्यक्ष सोनिया गांधी के क़रीबी सहयोगी हुआ करते थे. वडक्कन कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसे पद पर भी रहे. लेकिन कांग्रेस छोड़ते हुए वडक्कन ने कांग्रेस के नेतृत्व पर ही सवाल उठा दिए. वडक्कन ने कहा, ‘पार्टी में कौन पावर सेंटर है, यह पता ही नहीं चल पा रहा था.

सभी जानते हैं कि बीजेपी इस समय दक्षिण भारत में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में लगी है. माना जा रहा है कि टॉम वडक्कन इस समय केरल में उसका जनाधार बढ़ाने के लिए ख़ासे काम आ सकते हैं. वो केरल के बड़े कांग्रेसी नेता हैं. दलबदल की इस राजनीति से एक तरफ जहां कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है, दूसरी तरफ भाजपा इन नेताओं के जरिए अपना चुनावी समीकरण सुधारने में जुटी हुई है. इसके अलावा हरियाणा में बीजेपी ने कांग्रेस के एक बड़े नेता और पूर्व सांसद अरविंद शर्मा को तोड़कर अपने पाले में शामिल कर लिया है.एक के बाद एक कांग्रेस नेताओं के जाने राहुल गांधी के सामने ये संकट खड़ा हो गया है कि वे सरकार के साथ चुनावी लड़ाई लड़ें या फिर अपनों को टूटने से रोके.

बड़ी बात ये है कि बीजेपी में कांग्रेस के ऐसे नेता शामिल हो रहे हैं जिनकी अपने-अपने इलाकों और राज्यों में ठीक ठाक जनाधार रखते हैं. इन नेताओं के बीजेपी में आने के बाद बीजेपी को उम्मीद है कि उनके इलाकों की कई लोकसभा सीटों पर भगवा दल का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है. वहीं इन नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के  बाद राहुल गांधी तथा प्रियंका वाड्रा की उन उम्मीदों को करारा झटका लग रहा है, जिसके तहत वह बीजेपी को हारने के बड़े-2 सपने देख रहे हैं.

कांग्रेस के ये नेता रंग चुके हैं भगवा रंग में

असम में कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे गौतम रॉय, कांग्रेस के पूर्व सांसद किरिप चालिहा, सिलचर से कांग्रेस विधायक रहे गौतम रॉय बीजेपी से जुड़ चुके हैं. ये सभी नेता जनाधार वाले नेता हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को झटका लगा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल भी 12 मार्च को भाजपा में शामिल हो गए. राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र विधानसबा में विपक्ष के नेता भी हैं. हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस के नेता डॉ. उमेश जाधव BJP में शामिल हुए हैं.

साथ ही मोदी शाह का गढ़ कहे जाने वाले गुजरात में भी कई कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. एक तरफ कांग्रेस गुजरात में हार्दिक पटेल को साथ लाकर लोकसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के प्रयास में जुटी है, दूसरी तरफ पार्टी के नेता लगातार उनका साथ छोड़ रहे हैं.जामनगर के विधायक वल्लभ धारविया BJP में शामिल हो गए हैं. जनवरी से अब तक पांच कांग्रेस विधायक गुजरात में कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं.

कांग्रेस में मची इस भगदड़ के बाद सवाल ये उठने लगा है कि कांग्रेस में प्रियंका गांधी आई लेकिन भगदड़ वो भी नहीं रोक पाई. इस भागम भाग के पीछे दो वजहें हैं हो सकती हैं. या तो कांग्रेस नेताओं को लगने लगा है कि इस बार भी कांग्रेस से चुनाव लड़कर कोई फायदा नहीं होने वाला या फिर ये कि इन नेताओं को राहुल गांधी के नेतृत्व में उतनी तरजीह नहीं मिल रही थी जितनी सोनिया गांधी के नेतृत्व में. हाल फिलहाल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में ऐसे कई नेता भी शामिल हैं जो सोनिया गांधी की टीम का हिस्सा थे.

कांग्रेस बीजेपी के सामने खुद को विकल्प बताकर चुनावी लड़ाई लड़ रही है, लेकिन हर राज्य में हालात अलग अलग हैं. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अपना जनाधार बचाने के लिए पहले ही जूझ रही है. और बीजेपी यहां टीएमसी के मुकाबले में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी में लक्ष्य 22 सीट जीतने का है. अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी रणनीतिकारों ने ममता बनर्जी के खेमे में तो सेंधमारी की ही है साथ ही कांग्रेस के उन नेताओं को भी अपनी पार्टी में शामिल किया है जिन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति का अनुभव है और वहां की समझ भी. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कई नेता अबतक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. इनमें 12 मार्च को बागदा से कांग्रेस विधायक दुलाल बर BJP में शामिल हुए.

कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे तथा अब बीजेपी में शामिल हो चुके मुकुल राय ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ ही TMC के भी कई और नेता BJP में शामिल होंगे. कांग्रेस नेता दीपा दासमुंशी के भी BJP में शामिल होने की चर्चा चल रही है.

2019 की लड़ाई कांग्रेस के लिए बहुत अहम है. इस लड़ाई को जीतने के लिए राहुल गांधी ने पूरी ताकत झोंक दी है. कांग्रेस को और मज़बूत बनाने के लिए उनकी बहन प्रियंका गांधी भी सक्रिय राजनीति में कूद गई हैं. लेकिन बीजेपी की फसल उजाड़ने की लड़ाई में कूदी कांग्रेस अपने ही खेत की बाड़बंदी नहीं कर पा रही है. उसके बड़े नेता लगातार पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं जिससे संदेश ये जा रहा है कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है तथा कांग्रेस के हारी हुई लड़ाई लड़ रही है.
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