मध्यप्रदेश में कमल को हराने वाले कमलनाथ की दावेदारी का सरदारों में व्यापक विरोध.. सिरसा व बग्गा ने खोला मोर्चा

इतिहास कभी पीछा नही छोड़ता है.. जिन कमलनाथ का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों में आज के लगभग 35 साल पहले आया था अब उसी दर्द ने एक बार फिर से उठाया है अपना सर और उन्ही कमलनाथ की मध्यप्रदेश में ताजपोशी का खुला विरोध करना शुरू कर दिया है .. मध्यप्रदेश में कमलनाथ की ताजपोशी को 1984 सिख विरोधी दंगो के पीड़ितों के जख्मो को कुरेदना बताने वाले दो बड़े सिख चेहरे तो खुल कर मैदान में ताल ठोंक चुके है ..इसमें सबसे पहला नाम है तेजिंदर सिंह बग्गा का जिन्होंने तो कमलनाथ की ताजपोशी के खिलाफ भूख हड़ताल तक का एलान कर दिया है और उसकी तिथि व समय भी बाकयदा घोषित कर दिया है ..दूसरा नाम अकाली दल के मनजिंदर सिंह सिरसा का है लेकिन हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सरदार सदस्य इस मामले में चुप्पी साध कर रखे हैं और उन्हें शायद कमलनाथ की ताजपोशी से कोई समस्या नही दिख रही है ..

यहां तक कि सरदारों के सबसे बड़े कथित शुभचिंतक खुद को दिखाने वाले खालिस्तानियों ने भी अब तक कोई बयानबाजी न कर के इस मामले को अपनी मूक सहमति दे दी है .. अकाली दल के नेता और विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को कहा कि अगर कांग्रेस कमलनाथ को मध्य मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाती है तो सिख इस फैसले के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन करेंगे। सिरसा का आरोप है कि कमलनाथ का 1984 के सिख विरोधी दंगों में हाथ रहा है।

सिरसा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की सिख विरोधी दंगों में शामिल लोगों को पारितोष देने की पंरपरा है। उन्होंने राहुल गांधी को चेतावनी दी कि वह पुुरानी परंपरा को न अपनायें। सिरसा ने कहा कि हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि कमलनाथ को उनके गलत कामों के लिए सजा मिले। कांग्रेस वाले न्यायपालिका और सीबीआई को नियंत्रित कर लें लेकिन वह ‘अपराधियों’ को नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि सिखों ने अब तक बहुत धैर्य रखा है लेकिन कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के फैसले से उनकेे धैर्य का बांध टूट जाएगा। मध्य प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस को मिली जीत के बाद कमलनाथ मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार बन कर उभरे हैं।




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