चुनाव से पहले वन्देमातरम पर फिर आघात.. समाजवादी और बसपाई नेता ने सार्वजनिक मंच से किया इसका अपमान

वो वंदेमातरम जिसके स्मरण मात्र से ही राष्ट्रभक्तों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं, देशप्रेम की भावना का ज्वार उमड़ने लगता है.. वो वंदेमातरम जिसको गाते हुए अमर हुतात्मा भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, आज़ाद, उधम सिंह, लाला जी आदि ने आजादी की लड़ाई लड़ी तथा हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान दिया.. वो वन्देमातरम जो हमेशा से ही राष्ट्रवाद की ज्वलंत प्रेरणा रहा है तथा आज भी वन्देमातरम के इसी मंत्र का उद्घोष करते हुए भारतीय सेना के जांबाज जवान दुश्मनों से राष्ट्र की रक्षा कर रहे हैं,,उस वन्देमातरम पर एक बार पुनः आघात हुआ है. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क़ ने वन्देमातरम का अपमान किया है.

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संभल लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क़ ने एलान कर दिया है कि वह किसी भी हालात में वंदेमातरम नहीं बोलेंगे. शफीकुर्रहमान बर्क़ ने कहा है कि यह गैर इस्‍लामिक है और मैं उसका विरोध करता रहूंगा. बता दें कि बर्क ने 1997 में संसद के 50 साल पूरे होने पर आयोजित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में भी वंदे मातरम का बहिष्कार किया था. इसको लेकर तब उनका तर्क था कि वंदेमातरम का मतलब भारत माता की पूजा या वंदना करना है और इस्लाम में पूजा करना जायज नहीं है. इसके अलावा 2013 में भी बर्क ने वन्देमातरम के का बहिष्कार करते  हुए ससंद से वाकआउट किया था.

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मुरादाबाद में बुधवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बर्क ने कहा कि वह आज ‘वंदे मातरम’ का खुलकर विरोध करते है तथा आगे भी करते रहेंगे तथा किसी भा हालात में वन्देमातरम नहीं बोलेंगे. आश्चर्य की बात ये है  कि बर्क के इस बयान को सपा प्रमुख अखिलेश यादव  तथा बसपा प्रमुख मायावती ने खारिज नहीं बल्कि चुप्पी साध ली है. इसके बाद ये भी सवाल उठ रहे है कि क्या अखिलेश तथा मायावती भी बर्क के बयान का समर्थन करते हैं?

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