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अखिलेश के खिलाफ बीजेपी से चुनाव लड़ रहे भोजपुरी स्टार निरहुआ के खिलाफ शुरू हुआ उन्माद.. काफिले पर कश्मीरी अंदाज में पत्थरबाजी

वो खुद को लोकतंत्र का कथित रखवाला बताते हैं..वो कहते हैं कि वह समाजवाद के प्रणेता लोहिया के अनुयायी हैं जो न्याय के लिए लोकतान्त्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं. उनके हर भाषण या बयानों में अक्सर सुनाई देता है कि वह हिंसा को कतई स्वीकार नहीं करते तथा यही कारण है कि वह मोदी सरकार को हटाने के लिए बसपा से हाथ मिला लिए हैं क्योंकि मोदी सरकार में लोकतंत्र का हनन हो रहा है, संवैधानिक मूल्यों पर हमला हो रहा है. संविधान को बचाने के लिए, लोकतंत्र को बचाने के लिए वह मायावती के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं.

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हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की जो इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. समाजवाद तथा अहिंसा की बातें करने वाले अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की वास्तविकता उस समय सामने आई जब आजमगढ़ से अखिलेश के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भोजपुरी स्टार बीजेपी उम्मीदवार दिनेश लाल यादव “निरहुआ” के काफिले पर सपा समर्थकों ने हमला कर दिया, कश्मीरी अंदाज में पत्थरबाजी कर दी.

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बता दें कि बीजेपी उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ का 8 अप्रैल को आज़मगढ़ में रोड शो था. निरहुआ का काफिला जब आज़मगढ़ पहुंचा तो सपा- बसपा गठबंधन के लोगों ने रोकने की कोशिश की और रोड जामकर निरहुआ तुम वापस जाओ के नारे लगाने लगे. पुलिस ने जब भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की तो लोगों ने पथराव शुरू कर दिया.. किसी तरह पुलिस ने भीड़ से निरहुआ के काफिले को बाहर निकाला. यहाँ सवाल उठता है कि ये कौन सा समाजवाद है जो अपने विरोधी प्रत्याशी के काफिले पर पत्थर फेंकता है?  सवाल ये भी है कि क्या अखिलेश यादव को डर है कि निरहुआ उनको आज़मगढ़ से हरा सकते हैं?

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