26 साल “हवा में उड़ गए जय श्री राम” का नारा देने वालों ने इस बार देखा कि – “हवा में गूंजा जय श्री राम”

बहुत लोग जो एकदम युवा हैं वो इस इतिहास से परिचित नही होंगे.. वो समय था जब श्रीराम भक्तों ने अपने बलिदान से श्रीरामजन्मभूमि की बाबर नाम के आक्रांता से मुक्ति की शुरुआत की थी..उस समय मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाने का आदेश दिया था जिसमें अनगिनत लाशें पवित्र नदी में बहा दी गयी थीं..तब भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ही 2 ऐसी पार्टियां थी जो श्रीराम मंदिर के पक्ष में थीं और बाकी सभी उन्हें साम्प्रदायिक शक्ति के नाम से बुलाया करते थे..

तब के विधानसभा चुनावों में श्रीराम लहर को देखते हुए तब समाजवादी पार्टी की तरफ से मुलायम सिंह व बहुजन समाज पार्टी की तरफ से कांशीराम ने हाथ बढ़ाया था और उस समय कुछ लोगो द्वारा नारा दिया गया था कि “मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम” .. यद्द्पि भाजपा अकेली ही संघर्ष की थी पर आखिर में उस को हार का मुंह देखना पड़ा था . इस बार एक बार फिर से 26 वर्ष के बाद वही समीकरण बनाने की कोशिश की गयी थी .

उत्तर प्रदेश में जहां इस बार समाजवादी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं अखिलेश यादव व बहुजन समाज पार्टी की तरफ से आगे हैं मायावती ..स्थितियां लगभग एक समान ही थीं क्योंकि इस बार भी उनके निशाने पर थी भारतीय जनता पार्टी जो उत्तर प्रदेश में शासित है एक भगवावस्त्र धारण किये हुए योगी के द्वारा . सत्ता का केंद्र माने जाने वाले राज्य उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के बीच दोस्ती और दुश्मनी के कई उतार-चढ़ाव आए हैं। इस उतार-चढ़ाव को जनता ने भी बखूबी देखा।

26 साल पहले ही बसपा और सपा ने दोस्ती की शुरुआत की थी। दोस्ती की शुरुआत हुई थी इटावा जिले से, जहां से पहली बार बसपा के संस्थापक कांशीराम उपचुनाव में जीत कर संसद पहुंचे थे। लेकिन इस जीत के पीछे मुलायम सिंह का बड़ा हाथ था. साल 1993 के बाद एक बार फिर दोनों दलों ने दावा किया कि, इस बार भी मिलकर उत्तरप्रदेश के साथ ही पूरे देश में मोदी लहर को रोकेंगे। आपको बता दें कि, यूपी में लोकसभा की कुल 80 सीटों में दोनों दल 38-38 पर चुनाव लड़ी लेकिन बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा ..
ऐसे में नये समीकरण के चलते भाजपा के लिए 2014 में मिली सीटों को बचाने की बड़ी चुनौती थी . यद्द्पि अखिलेश यादव का पिछला गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के साथ था जो सफल होने के बजाय असफल रहा था. समाजवादी पार्टी की नेत्री प्रीती चौबे ने यहाँ तक लिखा था कि बुर्के में अगर लोगों की तलाशी हो तो रामलीला में हनुमान या वानर सेना बने लोगों पर भी नजर रखी जाय .. लेकिन भाजपा की लहर के साथ इस बार हिन्दू और हिंदुत्व का ऐसा जोर था जो किसी भी गठबंधन पर भारी पड़ा और ये कहना गलत नहीं होगा कि इस बार “हवा में गूंजा जय श्री राम” …
Share This Post