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जिन उद्धव से कभी विपक्ष ने कर रखी थी बहुत आशा अब उन्ही ठाकरे का ये रहा उसी विपक्ष को जवाब.. शिवसेना स्टाइल में

जिन उद्धव ठाकरे के पिछले बयानों से विपक्ष ने उनसे कई उम्मीदें पाल रखी थी अब उन्ही उद्धव ने न सिर्फ उन तमाम उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है बल्कि अपने पुराने अंदाज़ में शिवसेना वाली स्टाइल में उनको निराश भी कर दिया है . इसको हिन्दू संगठन भी एक बड़ी खुशखबरी के रूप में देख रहे हैं .. ख़ास कर वो लोग जो नहीं चाह रहे थे हिन्दू वोटो का विभाजन . राजनीति ने अचानक ही ऐसी करवट ले ली है जो महाराष्ट्र ही नहीं पूरे भारत में चुनावी समीकरणों को बदल कर रख दिया है .

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा कि पवार और मायावती का चुनाव ना लड़ना इस बात का संकेत है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में जीतकर लौटने का रास्ता साफ है. संपादकीय में कहा गया है, ‘शरद पवार के साथ मायावती ने भी लोकसभा चुनाव ना लड़ने का फैसला किया है. महत्वपूर्ण बात यह है कि वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर हैं.’ मायावती का हवाला देते हुए शिवसेना ने कहा कि वह देशभर में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करना चाहती हैं ..

पवार ने भी माढा लोकसभा सीट से इसी तरह भगाने का रास्ता चुना. राकांपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि पवार पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अपने परिवार और पार्टी सदस्य को एकजुट नहीं कर सके. शिवसेना ने व्यंग्यपूर्ण ढंग से कहा, ‘रंजीतसिंह मोहिते पाटिल का राकांपा छोड़ने और भाजपा में शामिल होने का फैसला पवार के लिए बड़ा झटका है. तमाम हिंदूवादी समूहों ने इसको देश की जरूरत बताया था और आखिरकार उनके सपनों को सच होने जैसा ही प्रतिफल सामने आया जब भारतीय जनता पार्टी व शिवसेना ने एलान किया कि वो आने वाला चुनाव एक साथ ही लड़ेंगे..

ज्ञात हो कि भारतीय जनता पार्टी व शिवसेना में गठबंधन का सबसे मजबूत आधार हिंदुत्व है जिसको ले कर दोनों संगठन एक लंबे समय से आगे बढ़ रहे हैं .. जहां पहले बाला साहब ठाकरे के आगे भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता प्रणाम की मुद्रा में दिखते थे तो वहीं बाला साहब ठाकरे ने भी गुजरात दंगों व श्रीराम मंदिर आदि अति सनसनीखेज मुद्दो पर खुल कर भाजपा का पक्ष लिया था ..

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