कभी कहा था मायावती ने- “पूरा यादव खानदान गिरेगा मेरे पैरों में”.. फिलहाल डिम्पल यादव ने छुए थे पैर

वर्तमान राजनीति में जो सबसे बड़ी चौंकाने वाली चीज हुई है वो है समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन..मुलायम तथा माया का मिलन.. चौंकाने वाली इसलिए क्योंकि 2014 की लोकसभा चुनावों में शून्य सीटों के साथ हाशिए पर पहुंच गई मायावती से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या कभी सपा-बसपा में गटबंधन हो सकता है, तो मायावती का जवाब था जब तक पूरा यादव कुनबा मेरे पैर पर गिरकर मांफी नहीं मांग लेता में इस बारे में नहीं सोच सकती.

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आज ये बात इसलिए की जा रही है क्योंकि हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी तथा कन्नौज लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार डिम्पल यादव ने मायावती के पैर छुए थे.  डिंपल यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती के पैर क्या छुए अचानक से यूपी की सियासी हवा में गरमा गई. लोगों को वो दौर याद आने लग गया जब गेस्ट हाउस कांड की कड़वी यादों लिए मायावती, मुलायम पर वार करतीं थीं.

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2014 के लोकसभा चुनावों के परिणाम आयें तो सियासी दल चौंक गये. जनता ने मोदी तथा बीजेपी को इतना ज्यादा समर्थन दिया कि ज्यादातर दल हवा हवाई हो गये. सपा को जहाँ मात्र 5 सीटें मिली जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुल पाया. इसके बाद जब मायावती से पत्रकारों ने पूछा कि क्या कभी सपा-बसपा में गटबंधन हो सकता है, तो मायावती का जवाब था जब तक पूरा यादव कुनबा मेरे पैर पर गिरकर मांफी नहीं मांग लेता में इस बारे में नहीं सोच सकती.

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अब अखिलेश मायावती केसाथ गठबंधन कर चुके हैं. डिंपल यादव सार्वजनिक तौर पर मायावती के पैर छू चुकी हैं  तथा मुलायम भी मायावती के साथ मंच पर नजर आ चुके हैं तब लोगों को मायावती के पुराने बयान याद आ रहे हैं. 1993 विधानसभा चुनावों में भी सपा-बसपा के बीच गठबंधन हुआ था और तब दोनों दलों ने हवाओं का रुख बदलते हुए सरकार बनाई थी. हालांकि ये गठबंधन कुछ गंभीर कारणों से लंबे समय तक नहीं चल सका था.

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1995 के लखनऊ गेस्ट कांड के बाद मायावती ने गठबंधन तोड़ लिया और मुलामय के लिए कहा कि वो जिस थाली में खाता है उसी में छेंद करता है. अपनी बायोग्राफी में मायावती ने मुलायम के लिए काफी कुछ लिखा और आरोप लगाए. माया ने कहा कि- मिलायम सिंह द्वारा मुझे प्रताड़ित और पीड़ित करने का प्रयास किया गया है. मायावती ने 2006 में कहा था कि ”मैं मुलायम को तब माफ करूंगी जब वो 2 जून 1995 की घटना के लिए मुझसे सार्वजनिक तौर पर माफी मांगेंगे”. राजनैतिक हलकों में अब चर्चा होने लगी है कि मायावती ने अपने आगे यादव परिवार को पूरी तरह से झुकने को मजबूर कर दिया है, भले ही  इसके मूल में मोदी नाम का खौफ हो.

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