भारत की ही अदालत से जमानत पा गया वो दुर्दांत आतंकी जहूर जो छेड़ना चाहता था भारत के खिलाफ जंग

भले ही आतंकी के गिरफ्तार होने के बाद तमाम लोगों द्वारा कहा जाता हो कि आतंकवाद का कोई धर्म नही होता लेकिन उसकी व्यापक स्तर पर की जाने वाली पैरवी देख कर आप कट्टरपंथ का उसी अंदाज़ में अनुमान लगा सकते हैं जैसे कश्मीर में सेना के हाथों मारे जाने के बाद किसी आतंकी के जनाज़े में उमड़ी भीड़ , उसका हो रहा दफन प्रक्रिया और उसके जनाज़े में गूंजने वाले नारे सुन कर लगाया जाने लगा है आज कल .

एक बार फिर से एक और दुर्दांत आतंकी जिस पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप था और बहुत ही मुश्किल से सुरक्षा एजेंसियों के हाथ आया था , वो पा गया है भारत की ही अदालत से जमानत . विदित हो कि राष्ट्र के खिलाफ जंग और आतंकियों को भारत के सैनिको के कत्ल करने के लिए की जाने वाली टेरर फंडिंग के दुस्साहसिक मामले में जेल में बंद कश्मीर के व्यापारी से आतंकी बने जहूर अहमद शाह वटाली को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गयी है ..

ये आदेश देने वाले न्यायाधीश का नाम एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल जी हैं जिनकी बेंच ने दो लाख के निजी मुचलके पर इस कुख्यात आतंकी जहूर वटाली की जमानत याचिका मंजूर की है। यहाँ पर ये ध्यान रखने योग्य है कि इस आतंकी की गिरफ्तारी के समय कईयो ने खुद को इस से अलग करते हुए कहा था कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता लेकिन बाद में इसकी व्यापक स्तर पर पैरवी की गयी है . इस आतंकी को सुरक्षा एजेंसियों की अथक कोशिश के बाद 17 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया गया था। वटाली को एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में कश्मीर से गिरफ्तार किया था। इस मामले में सात कश्मीरी अलगाववादी नेता भी गिरफ्तार किये गये थे। इन सभी पर पाकिस्तान के टुकड़ों पर पल रहे दुर्दांत इस्लामिक आतंकी और हिजबुल प्रमुख सैयद सलाहउदीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ आतंकी युद्ध छेडऩे और आतंकियों की मद्द करने के आरोप हैं। वयोवृद्ध हुरिर्यत नेता सईद अली शाह गिलानी के बेटे भी हिरासत में हैं जबकि सलाहउदीन के दो बेटे भी पूछताछ के लिए हिररसत में लिये गये हैं।

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