हज यात्रा के दौरान 35 जायरीन मरे… सभी इस्लामिक मुल्क मिश्र के निवासी

मुस्लिम सम्प्रदाय के लोगों में हज भी इनके मजहब का हिस्सा होता हैं, इनके सम्प्रदाय में अपने पूरे जीवन काल में एक बार मक्का में हज पर जाना बहुत जरूरी माना जाता हैं। पर कुछ सालों से हज यात्रियों के साथ कुछ न आतंकवादी सरगना की आतंकी घटनायें घटित होती रहती हैं जिसकी वजह से कई की मौत हो जाती हैं।

पर ये सरकार अपनी गलतियों का ना स्वीकार करतें हुये उन यात्रियों पर इल्जाम डालती हैं। अभी हाल ही घटना हैं कि 35 मिस्त्र यात्रियों की मौंत पाक सरकार की लापरवाही के कारण हो गईं और इन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए यह कह दिया कि यह यात्री पहले से बीमार थे। आपको बताते चले कि जब भी कोई मुस्लिम मक्का में हज के लिए उससें पहले उसे वहां के लिए 1 से 3 लाख रूपयें तक देना पड़ता हैं वहां पर रहने के लिए क्योंकि वहां सरकार जो सुविधाये मुहैया कराती हैं।
उसके लिए वह इतने पैसे चार्ज करती हैं तो आखिर पाक सरकार इतनी लापरवाही क्यों बरतती हैं कि हर बार लोग हज पर नहीं जाते हैं बल्कि अपनी मौत को दावत देने के लिए जाते हैं बहुत कम ही लोग अपने घर सही सलामत लौट पातें हैं नही तो आती हैं तो केवल उनकी मौत की खबर। क्या कुरान में ये लिखा हैं कि अपनी मौत को जब तक आप दावत नही दोगें तब तक आप एक सच्चे मुसलमान नही कहला सकते हो, ये कोई भी धर्मं और मजहब नही कहता हैं कि आप मौत की कलम से लिखकर हमारे महजब के नियम निभाइए।
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