संसार बदल रहा केवल कुछ स्थानों के कट्टरपंथियों को छोड़कर… सऊदी अरब में फिर खुल सकते हैं सिनेमा घर

सऊदी अरब की छोटी सी हरकत भी दूसरे मुल्कों में परेशानी खड़ी कर सकती है. बीते दो दशकों में सऊदी अरब ने कुरान का अंग्रेजी अनुवाद बांटना शुरू किया. धीरे धीरे दुनिया की दूसरी भाषाओं में भी ये किताब बांटी गई. बीते दशकों में सऊदी अरब वाले इस्लाम का प्रभाव दुनिया में तेजी से फैला है. कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव के बीच ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के स्कॉलर विलियम मैकैंट्स सऊदी अरब को “आग लगाने वाला और आग बुझाने वाला” कहते हैं.

मैकेंट्स के मुताबिक, “वे इस्लाम के बेहद विषैले रूप को बढ़ावा देते हैं जो बहुत ही कम सच्चे धार्मिक और बाकी लोगों के बीच साफ लकीर खींचता है, मुसलमान और गैर मुसलमान.” मैकेंट्स इस कट्टरपंथी विचारधारा को हिंसक जिहाद के लिए जिम्मेदार मानते हैं. वही सऊदी अरब के संस्कृति और सूचना मंत्रालय का कहना है कि मार्च में सऊदी अरब में सिनेमा खुल सकते हैं. मंत्रालय का कहना है कि सऊदी अरब का बोर्ड ऑफ द जनरल कमिशन फॉर ऑडियोविजु्अल मीडिया सिनेमाघरों को लाइसेंस देने के लिए सहमत हो गया है.

इस कदम को भी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के 2030 विजन का हिस्सा माना जा रहा है जिसका मकसद तेल पर निर्भर देश सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में विविधता लाना है. कट्टरपंथी सिनेमा को सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के लिए खतरा मानते हैं. इसीलिए सऊदी अरब में सिनेमाओं पर पाबंदी लगायी गयी. जनवरी 2017 में ही सऊदी अरब के सबसे बड़े धार्मिक नेता ने सिनेमा को “अनैतिक” बताते हुए कहा कि इससे नैतिक मूल्य भ्रष्ट होंगे.

मंत्रालय को उम्मीद है कि सऊदी अरब में 2030 तक लगभग तीन सौ सिनेमा होंगे, जिनमें दो हजार से ज्यादा स्क्रीनों पर फिल्में देखी जा सकेंगी. सऊदी अरब में 1980 के दशक के शुरुआत में सिनेमा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. तब से पहली बार अब इस प्रतिबंध को हटाने की बात हो रही है. सूचना मंत्री ने कहा कि पहला सिनेमाघर मार्च 2018 में खुलने की उम्मीद है. अधिकांश सार्वजनिक जगहों की तरह वहां भी पुरुषों और परिवारों के लिए संभवतः अलग अलग हिस्से होंगे.

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