शिया और सुन्नी की लड़ाई में मर रहे है यमन के मासूम बच्चे…

इस्लामिक कट्टरता के भेंट चढ़ रहे यमन के मासूम बच्चे, इस्लामिक कट्टरता को बढ़ावा देने में सऊदी इतना असवेंदनशील हो गया है की उसे मासूम बच्चे तक नहीं दिख रहे है। सऊदी के सुन्नी संघठन के लोग नजाने कितने हमले और कितने लोगों को अपनी चपेट में लेंगे, अक्सर कट्टरपंती सुन्नी संगठन शियाओं के स्थानों को निशाना बनाते रहे हैं। सऊदी में सुन्नी युवा विद्रोही गुटों में शामिल होकर शियाओं पर हमला करने की फ़िराक में रहते है।

बता दें कि सुन्नी संघठन ज़्यादातर अल-क़ायदा की कट्टर विचारधारा को मानते हैं। सिया सुन्नी का विवाद बहुत पुराना है। इस साल के मसौदा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल यमन में गृह युद्ध में मारे गए एवं घायल हुए आधे से अधिक बच्चों के लिए जिम्मेदार है सऊदी नित गठबंधन की सेना। संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को प्राप्त हुई रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गयी है कि गठबंधन हमले में 1,340 बच्चों की मौत हुई जिनमें से 683 यानी 51 प्रतिशत गठबंधन के हमलों में मरे गए है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों एवं अस्पतालों पर 52 में से 38 हमले यानी तीन चौथाई हमले गठबंधन ने किए।
बताते चले बच्चों एवं सैन्य संघर्ष पर इस मसौदा रिपोर्ट का परिणाम पिछले साल की रिपोर्ट से मेल खाता है जब अमेरिका समर्थित गठबंधन को बाल अधिकारों के उल्लंघन के लिए संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में डाला गया था। सऊदी अरब और अन्य गठबंधन समर्थकों ने कई संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम की फंडिंग रोकने की धमकी दी थी जिसके बाद इसे तत्कालीन महासचिव बान की मून ने सूची से हटा दिया था। लेकिन बान ने अपने बयान में कहा था कि वह रिपोर्ट को लेकर अटल हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2015 में यमन में 1953 युवाओं के मौत होने की पुष्टि की है।
यह संख्या वर्ष 2014 की तुलना में 6 गुना ज्यादा है। बता दे बाल एवं सशस्त्र संघर्ष के मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि विरिजीना गाम्बा ने यह सिफारिश की है कि सऊदी नीत गठबंधन को बच्चों की हत्या करने या उन्हें विकलांग बनाने वाले देशों की सूची में शामिल किया जाए। जिस पर जवाबी बयान देते हुए संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने मसौदा रिपोर्ट देखी नहीं है जो लीक हो गई है। उन्होंने कहा कि इसकी विषयवस्तु पर अब भी वार्ता चल रही है और इस बात का फैसला गुतारेस करेंगे कि काली सूची में किसे डाला जाए।
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