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अमेरिका में निकली इस्लाम विरोधी रैली चारो तरफ लगे ट्रंप जिंदाबाद के नारे. सबने बोला- ‘दादागिरी नहीं चलेगी’

 अमेरिका में एक बार फिर इस्लामिक कानून, शरिया’ के खिलाफ लोगों ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को मुस्लिम-विरोधी कहा जा रहा है और वही पर अमेरिकीय मानवाधिकार संगठनों ने इन प्रदर्शनों की सख्त आलोचना की है। ‘एक्ट फॉर अमेरिका’ नाम के चर्चित इस दक्षिणपंथी संगठन की अपील पर अमेरिका में करीब 20 राज्यों के 28 शहरों में आम नागरिको ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। अमेरिका की गैर-सरकारी कानूनी संस्था एसपीएलसी के अनुसार एक्ट फॉर अमेरिका, एक कट्टरपंथी संगठन है। इसे अमेरिका का सबसे बड़ा मुस्लिम-विरोधी संगठन भी माना जाता है।
बता दें कि यह संगठन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी समर्थन करता है। इस संगठन ने पिछले कुछ सालों में मुस्लिमों और शरणार्थियों के खिलाफ कड़े कानून बनाए जाने के लिए भी अभियान चलाया था। वही पर एक्ट फॉर अमेरिका की अपील पर बहुत बड़ी जनसंख्या में लोग ने शरिया कानूनों के खिलाफ विरोध के लिए सड़कों पर उतरे तो कई जगहों पर इन प्रदर्शन के खिलाफ मार्च निकाला गया। कई जगहों पर दोनों तरफ के प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई और कई लोग घायल भी हुए। अमेरिका की वेबसाइट पर कहा गया है कि शरिया (इस्लामिक कानून) मानवाधिकारों व अमेरिकी कानूनों के खिलाफ है। इन शरिया-विरोधी प्रदर्शन के खिलाफ उदारवादी ऐंटी-फासिस्ट संगठन ने भी अपना अलग मार्च निकाला। 
क्या है इस्लामिक कानून, शरिया’?
शरीया (अरबी), जिसे शरीया क़ानून और इस्लामी क़ानून भी कहा जाता है, इस्लाम में धार्मिक क़ानून का नाम है। इस क़ानून की परिभाषा दो स्रोतों से होती है। पहली इस्लाम का धर्मग्रन्थ क़ुरान है और दूसरा इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद द्वारा दी गई मिसालें हैं इस्लामी क़ानून को बनाने के लिए इन दो स्रोतों को ध्यान से देखकर नियम बनाए जाते हैं। इस क़ानून बनाने की प्रक्रिया को ‘फ़िक़्ह’ कहा जाता है। शरीया में कई विषयों पर मत है, मुस्लिम यह तो मानते हैं कि शरीया परमात्मा का क़ानून है लेकिन उनमें इस बात को लेकर बहुत अंतर है कि यह क़ानून कैसे परिभाषित और लागू होना चाहिए।
सुन्नी समुदाय में चार भिन्न फ़िक़्ह के नज़रिए हैं और शिया समुदाय में दो। अलग देशों, समुदायों और संस्कृतियों में भी शरीया को अलग-अलग ढंगों से समझा जाता है। शरीया के अनुसार न्याय करने वाले पारम्परिक न्यायाधीशों को ‘क़ाज़ी’ कहा जाता है। कुछ स्थानों पर ‘इमाम’ भी न्यायाधीशों का काम करते हैं लेकिन अन्य जगहों पर उनका काम केवल अध्ययन करना-कराना और धार्मिक नेता होना है। इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए शरीयत इस्लामिक समाज में रहने के तौर-तरीकों, नियमों और कायदों के रूप में कानून की भूमिका निभाता है। पूरा इस्लामिक समाज इसी शरीयत कानून या शरीया कानून के हिसाब से चलता है। 
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