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नार्वे की एक मस्जिद पर हमला.. ठीक न्यूजीलैंड के अंदाज़ में, यहाँ भी तैयारी थी कई लाशें बिछाने की

न्यूजीलैड में मस्जिद पर हुए प्राणघातक हमले के बाद 2 मज़हबो के बीच अघोषित युद्ध की शुरुआत के जिस दावे को सुदर्शन न्यूज प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने अपने बिंदास बोल में बताया था उस पर लगातार मुहर लगती दिखाई दे रही है . श्रीलंका में चर्चो पर इस्लामिक आतंकी हमले के बाद अब उसका बदला जैसा लेने की तैयारी चल रही थी नार्वे में, लेकिन कुछ लोगों की सतर्कता के चलते दुबारा न्यूजीलैंड जैसा रक्तपात होने से बच गया और बच गई कई जाने .

यूरोप का अमूमन शांत कहा जाने वाला देश नार्वे इस से पहले अपनी सेक्युलर छवि के लिए जाना जाता रहा है.. कभी श्रीलंका में जा कर LTTE और श्रीलंका सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला नार्वे अब अपनी आन्तरिक समस्या से जूझेगा जिसकी शुरुआत बेहद खतरनाक अंदाज़ में हुई है . ये घटना लगभग एक सप्ताह पहले की है जब घातक हथियार ले कर एक युवक मस्जिद में घुस गया और हिसंक अंदाज़ में निशाने पर उन्हें लिया जो उस समय मस्जिद में थे .

पुलिस को घटना के फौरन बाद सूचना दे दी गई। ओस्लो पुलिस ने बताया कि ये नॉर्वे का युवक है और यहीं का रहने वाला है। वो पड़ोस के इलाके में ही रहता है। ये हमला हज के समापन के मौके पर मनाई जाने वाली ईद-उल-अकाहा से पहले हुआ था.. पुलिस ने बताया कि हमले के कुछ घंटों बाद बेइरम उपनगर में एक घर से संदिग्ध हमलावर के परिचित की एक युवती का शव मिला। बेइरम में ही गोलीबारी हुई थी। जांचकर्ताओं ने युवती की मौत के संबंध में जांच शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार हमले के समय अल नूर इस्लामिक केंद्र में केवल तीन लोग ही मौजूद थे। मस्जिद के इमाम इरफान मुश्ताक ने हमलावर के बारे में बताया कि वो काले रंग का कपड़ा पहने हुए था। उसने हेलमेट और बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी हुई थी। शाम 4 बजे के बाद ओस्लो उपनगर के अल-नूर इस्लामिक सेंटर में गोलीबारी के बारे में पुलिस को सूचना दी गई थी। हमले के बाद सतर्क पुलिस बल ने युवक को गिरफ्तार कर लिया  है और पूछताछ चल रही है . यहाँ मस्जिद में संख्या कम थी जिसके चलते भारी खून खराबा बच गया ..

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