एक और देश जहाँ मुसलमानों ने घोषणा कि खुद के खतरे में होने की.. मिल रही है मस्जिदों को बम से उड़ाने की चुनौती


जिस प्रकार से असहिष्णुता का प्रचार करने वाला समूह अपनी सक्रियता दिखाता जा रहा है और कभी फर्जी खबरों और कभी नकली वीडियो आदि से माहौल को बाकी अन्य के खिलाफ बनाने का प्रयास कर रहा है उसका कहीं न कही नकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है.. अपने कई बिंदास बोल में सुदर्शन न्यूज के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा था कि ईसाई और मुस्लिम धर्मयुद्ध की शुरुआत हो चुकी है जो पहले न्यूजीलैंड और अब जर्मनी में सही साबित हो रही है .

विदित हो कि न्यूजीलैंड में मस्जिद पर हमले के बाद जिस प्रकार से ईस्टर में श्रीलंका रक्त से नहा गया अब उसका असर दुनिया के बाक़ी देशो में भी होना शुरू हो गया है . चीन पहले से ही बदनाम है अपने देश में मुसलमानों को अंतहीन प्रताड़ना देने के लिए और अब इसी बीच में बदतर हालात बनते जा रहे हैं यूरोप के विकसित कहे जाने वाले देश जर्मनी में . यहाँ पर मुसलमानों के एक प्रकार से घोषणा कर दी है कि उनके ऊपर खतरा है और वो जर्मनी में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं .

ध्यान देने योग्य है कि जर्मनी में मुसलमानों का कहना है कि वो मस्जिदों को बम से उड़ाने जैसी धमकियों से डरे हुए हैं . जुलाई 2019 में जर्मनी के इजरलोन, म्यूनिख और कोलोन की मुख्य मुस्जिदों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली थीं. हाल में कुछ इसी तरह की धमकियां डुइसबुर्ग, मनहाइम और मांइस शहर की मस्जिदों को भी मिली हैं. मुसलमानों ने जर्मन प्रशासन से अपनी अपील में कहा है, “मुसलमान बेहद ही परेशान हैं. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे कदम उठाए जिससे लोगों में दोबारा विश्वास पैदा हो.


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