अब पाकिस्तान को औकात दिखाई ऐसे देश ने जो वर्तमान में इस्लामिक आतंक के खिलाफ लड़ रहा सबसे मजबूती से


कश्मीर मामले पर तमाम नापाक कोशिशों के बाद भी भारत के खिलाफ दुनिया का समर्थन न मिलने से पाकिस्तान अब झूठ के सहारे हवा बनाने की कोशिश में है. जिस दिन से मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाई है, आतंकी मुल्क पाकिस्तान, भारत के खिलाफ न सिर्फ भड़काऊ बयान दे रहा है बल्कि दुनियाभर के देशों से भारत की शिकायत कर रहा है लेकिन दुनिया का कोई भी देश पाकिस्तान की बात को सीरियस नहीं ले रहा.

अब उस मुल्क ने पाकिस्तान को उसकी वास्तविक औकात दिखाई है जो मुल्क पिछले कुछ समय से इस्लामिक आतंक तथा चरमपंथ का सबसे बड़ा काल बनकर उभरा है. हम बात कर रहे हैं भारत के पड़ोसी मुल्क श्रीलंका की. वही श्रीलंका जहाँ के चर्चों तथा होटलों पर अप्रैल में भीषण इस्लामिक आतंकी हमले हुए थे, जिसके बाद से श्रीलंका ने न सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद बल्कि उनके रहनुमाओं तथा पनाह्गारों के खिलाफ भी रौद्र रूप अपनाया हुआ है.

खबर के मुताबिक़, श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेन द्वारा जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताने का दावा कर दिया. इसके तुरंत बाद श्रीलंका ने स्पष्टीकरण दिया है कि पाकिस्तान झूठ बोल रहा है और राष्ट्रपति सिरिसेन ने कभी भी जम्मू-कश्मीर के विषय में इस तरह की टिप्पणी नहीं की है. बता दें कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने से बौखलाया पाकिस्तान तमाम देशों की सरकारों से संपर्क कर उनसे समर्थन मांग रहा है. जब उसे इसमें सफलता नहीं मिल रही तब वह विदेशी सरकारों की तरफ से झूठा दावा पेश कर रहा है. ऐसा ही दावा श्रीलंका में पाकिस्तान उच्चायोग ने 21 अगस्त को किया.

पाकिस्तानी उच्चायोग ने बयान जारी कर कहा, पाकिस्तानी उच्चायुक्त मेजर जनरल शाहिद अहमद हशमत ने राष्ट्रपति सिरिसेन से मुलाकात कर उन्हें जम्मू-कश्मीर के हालात से अवगत कराया. बयान में दावा किया गया कि राष्ट्रपति सिरिसेन ने जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया और वहां की समस्या का समाधान कश्मीरियों की इच्छा और संयुक्त राष्ट्र के संकल्प से किए जाने की आवश्यकता जताई. साथ ही सिरिसेन ने मामले में खुद मध्यस्थ बनने की इच्छा भी जताई। इसके लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के बैनर तले वार्ता शुरू करने का रास्ता भी सुझाया.

इस बयान के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति सिरिसेन ने ऐसी कोई बात नहीं कही है और पाकिस्तानी उच्चायोग की ओर से जो बयान दिया गया है वह झूठा है. राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर राष्ट्रपति सिरिसेन ने पाक उच्चायुक्त से मुलाकात की, और पाक उच्चायुक्त ने अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35A पर लिए गए भारत के फैसले की जानकारी दी. श्रीलंकाई राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से कहा गया कि जहां तक कश्मीर की बात है, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया था. राष्ट्रपति कार्यालय ने साफ किया कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े किसी भी मुद्दे पर राष्ट्रपति सिरिसेन ने टिप्पणी नहीं की.

बता दें कि अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35A पर भारत के फैसले को श्रीलंका ने न सिर्फ अंदरूनी मामला बताया था बल्कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का स्वागत भी किया था. एक ट्वीट में श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा था कि 70% बोध धर्म मानने वाले लोगों के साथ यह भारत का पहला बोध बहुल राज्य होगा. कश्मीर मुद्दे पर पड़ोसी देशों ने भी पाक से बनाई दूरी. श्रीलंका की तरह अन्य पड़ोसी देशों ने भी कश्मीर मुद्दे पर पाक का समर्थन नहीं किया है. बांग्लादेश, मालदीव, भूटान ने अनुच्छेद 370 और 35A पर भारत के फैसले को अंदरूनी मामला बताया है. वहीं नेपाल और अफगानिस्तान ने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताया है.


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