श्रीलंका में मुसलमानों पर नई आफत.. वो आफत जो मांग के रूप में कई हिंदूवादी उठा चुके हैं भारत में भी

ईसाइयों के त्यौहार ईस्टर पर श्रीलंका के होटलों व चर्चों पर सिलसिलेवार इस्लामिक आतंकी हमलों के बाद जिस तरह से वहां की सरकार तथा जनता मजहबी चरमपंथ के खिलाफ तनकर खड़ी हुई थी, उसे देखकर दुनिया चौंक गई थी. एकतरफ श्रीलंकाई सुरक्षाबल हमले के जिम्मेदार इस्लामिक आतंकियों को चुन चुन कर मार रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ वहां की जनता भी आतंक के पनाह्गारों व आम कट्टरपंथी मुस्लिमों के खिलाफ आक्रामक हो गई थी.

श्रीलंका ईस्टर हमलों को वैसे तो लगभग 4 महीने हो चुके हैं लेकिन श्रीलंकाई जनता अभी भी इस दर्द को भूली नहीं है. श्रीलंका में अब मुस्लिमों पर नई आफत आन पड़ी है. श्रीलंका में मुस्लिमों के खिलाफ वहां की गैर मुस्लिम आबादी वो अभियान चलाया हुआ है, जिसकी मांग भारत में कई हिंदूवादी संगठन कर चुके हैं. खबर के मुताबिक़, श्रीलंका में मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार करना शुरू कर दिया गया है. बड़ी संख्या में श्रीलंका के गैर मुस्लिम लोग मुस्लिमों की दुकानों से सामान नहीं खरीद रहे हैं.

मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक़, कुछ महीने पहले, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से 90 किलोमीटर दूर कोट्टरमुल्ला गाँव में मोहम्मद इलियास घरों की मरम्मत करने वाला सामान बेचा करते थे. श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समाज के बीच सालों से दुकान चलाने वाले इलियास अपनी हार्डवेयर की दुकान से पर्याप्त कमाई कर लेते थे. लेकिन अब उनकी दुकान पहले जैसी नहीं चलती है. उनकी दुकान पर लोगों का आना कम हो गया है.

इलियास का कहना है कि इस बदलाव की शुरुआत उस दिन हुई जब श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सिलसिलेवार धमाकों में कई लोगों की मौत हुई थी.हमले के बाद के दिनों को याद करते हुए इलियास का कहना है कि  से बम धमाके हुए हैं तब से मेरे 90 प्रतिशत सिंहली ग्राहकों ने दुकान पर आना बंद कर दिया है. मेरा काम-धंधा पूरी तरह से ठप हो गया है. लाखों रुपए का नुक़सान हो गया है.  इलियास का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैं जल्द बड़ी परेशानी में आ जाऊंगा.

श्रीलंका के मुसलमान व्यापारियों का कहना है कि कि उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जाने लगा है. उनका कहना है कि मई के महीने में श्रीलंका के कुछ हिस्सों में मुसलमानों की दुकानों और घरों पर हिंसक हमले हुए. जून में एक बौद्ध साधु ने खुलेआम लोगों से मुसलमानों से सामान नहीं ख़रीदने की अपील की. उनका कहना है कि हमले की हमने भी निंदा की थी लेकिन सिंहली इससे संतुष्ट नहीं है. मुस्लिम नेताओं का कहना है कि मुसलमान समाज को लोगों की धमकी का सामना करना पड़ रहा है.

श्रीलंका के पुतलाम ज़िले में रहने वाले मोहम्मद नज़ीम कहते हैं, “सिंहली लोगों की भीड़ ने मेरे घर के बाहर ही मेरे भाई को मार डाला. मुझे नहीं पता था कि हमें इंसाफ़ मिल पाएगा या नहीं.” जबकि वहां की पुलिस का कहना है नज़ीम के भाई की हत्या से जुड़े मामले में मोहम्मद अमीर और मोहम्मद सैली नाम के दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इस मामले में जांच जारी है. ये भी कहा जा रहा है कि ईस्टर बम धमाकों के बाद हिजाब पहनने वाली मुसलमान महिलाओं को भी लोगों ने टारगेट किया. सरकार ने सुरक्षा कारणों से अब सार्वजनिक जगहों पर मुंह ढँक कर चलने पर रोक लगा दी है.

इसके अलावा महिला अधिकारों की बात करने वाले संगठनों ने कहा वो महिलाएं जो सिर पर स्कार्फ़ पहनकर चलती हैं उन्हें भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. मुसलमान महिला विकास ट्रस्ट की निदेशका जुवैरिया मोहिदीन कहती हैं, “जो मुसलमान महिलाएं सरकारी दफ़्तरों में काम करती हैं उन्हें भी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है. वो महिलाएं जो सिर्फ़ सिर पर स्कार्फ़ पहन कर भी दफ़्तर जाती हैं उन्हें घर जाकर साड़ी पहन कर आने के लिए कहा जाता है.”

मीडिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईस्टर हमले के बाद कई सिंहली महिलाएं बसों में मुसलमान महिलाओं के साथ बैठने तक से इनकार कर देती हैं क्योंकि उन्होंने पारंपरिक अबाया (एक ढीली ड्रेस पहनी) पहना होता है. मुसलमान समाज के प्रतिनिधियों का कहना है मुसलमान व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का बहिष्कार और उनके साथ होने वाली घटनाएं बौद्ध भिक्षुओं के संदेशों से प्रेरित हैं.

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