गर्दन रेतने व लाशें बिछाने ईराक गया था केरल का नशीदुल हमजफर… पकड़ा भी गया तो भी नहीं बताया कि वो भारतीय है.. अंदाजा लगाइए नफरत के स्तर का

केरल के रहने वाले नशीदुल हमजफर ने प्रण लिया मजहब के आधार पर लोगों की ह्त्या करने का, कत्लेआम मचाने का तथा  सोचकर वह केरल से ईराक भाग गया तथा दुर्दांत इस्लामिक आतंकी संगठन  ISIS में शामिल हो गया. अब उसको गिरफ्तार कर केरल लाया गया है. जानकारी मिली है कि उसके लैपटॉप में साल 2013 में उसके दोस्त ने कुछ भाषण कॉपी किए थे. ये वही भाषण थे जिन्होंने उसे इस्लामिल स्टेट खोरासन प्रांत (आईएसकेपी) में शामिल होने के लिए प्रेरित किया. गिरफ्तार होने के बाद उससे पूछताछ की गई, जिसमें उसने इस्लामिक स्टेट के कई राज खोले.

आपको बता दें कि इसी साल सितंबर में हमजफर (26) ऐसा पहला भारतीय बना जिसे अफगानिस्तान से निर्वासित किया गया है. वह गैर कानूनी तरीके से यहां दाखिल हुआ था. यहां वह आईएसकेपी से जुड़ा. उसका दोस्त शिहास उन्हीं 21 पुरुष, महिलाओं और बच्चों में शामिल है जो केरल को छोड़ ईरान के रास्ते से अफगानिस्तान में दाखिल हुए. यह लोग 2016 में केरल छोड़कर गए थे और अफगानिस्तान में आईएस द्वारा नियंत्रित स्थान पर गए. हमजफर ने बताया कि शिहास आएसकेपी की मीडिया टीम में काम करता है तथा एक अन्य दोस्त अश्फाक हीजरा (प्रवास) का इंचार्ज है. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हमजफर को अक्तूबर 2017 में तेहरान पहुंचने के बाद पहले ईरान के इसाफहान ले जाया गया जहां उसे अज्ञात व्यक्ति ने निर्वासन शिविर में रखा. उससे इसके बदले में 450 डॉलर भी लिए गए.

हमझफर ने कहा- ‘कैंप में लंबी लाइन लगी थी. उसने अधिकारियों से कहा कि वह अफगानी है इसलिए उसे अफगानिस्तान छोड़ा जाए. वहां उसका इंटरव्यू लिया गया और बॉयोमीट्रिक्स लिए गए. उसे पाकिस्तानी समझ जबरन पाकिस्तान जाने वाले वाहन में बिठा दिया गया. जिसके बाद उसने कहा कि वह अफगानी है तो उसे अफगान कैंप में पहुंचाया गया.’ उसने बताया कि उसे अफगानिस्तान के निमरूज में भेजा गया. जहां उसने अपने दोस्त अश्फाक से संपर्क किया. जिसके बाद उसने अज्ञात व्यक्ति अबु अली को वहां भेजा. अली उसे लेकर ही जाता इतने ही अफगान सिक्योरिटी फोर्स आ गई और उसे कस्टडी में ले लिया. उसने कई बार झूठ कहा कि वह अफगानी है लेकिन फोर्स को पता चल गया कि वह भारतीय है. सुरक्षाकर्मियों ने उसे अश्फाक और शिहास की तस्वीरें दिखाईं, उसने कहा कि वह उसके दोस्त हैं.

इसके बाद उसे अफगान इंटेलिजेंस जेल भेजा गया, जहां वह 3 महीने तक कस्टडी में रहा. इसके बाद उसे अमेरिकी जेल बगराम भेजा गया, यहां उसके बॉयोमीट्रिक्स लिए गए और 3 महीने तक कस्टडी में रखा गया. जिसके बाद उसे भारत भेजा गया. वह जाकिर नाइक भाषणों से प्रभावित था और अपने घर वालों से टीवी न देखने के कहता था। उसने अपनी मां और बहन से भी कहा था कि वह खुद को पूरी तरह ढंककर रखें। जिसके बाद उसके पिता ने भी उसे फटकार लगाई। वह कॉलेज से निकाला गया था और कॉलेज में ही उसकी मुलाकात शिहास से हुई थी। जो कि शराब और गांजे का आदि था। उसने कहा कि उसके दोस्त शिहास में कई बदलाव आने लगे थे, वह दाढ़ी बढा़कर रखने लगा, वह धार्मिक बातें करने लगा। हमजफर अपने दोस्तों के साथ जाकिर नाइक द्वारा फंडिड कार्यक्रम में भी शामिल हुआ था.

उसने कहा कि कार्यक्रम में इस्लाम और ईसाई धर्म के बारे में बताया गया था। जिसके बाद उसके दोस्त बेस्टिन विन्सेंट ने इस्लाम अपना लिया। विन्सेंट और उसकी पत्नी मरियम भी साल 2016 में अफगानिस्तान के लिए रवाना हुए थे. उसने आगे बताया कि उसके दोस्त शिहास ने मैसेज टू केरल नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। जिसमें वह संदेश भेजा करता था और कहता था कि 99 फीसदी मीडिया रिपोर्ट गलत हैं। वहां सब ठीक है। इसके बाद उसने उसे 110 पेज की एक पीडीएफ फाइल भी भेजी। जिसके बाद वह इस्लामिक स्टेट की ओर आकर्षित हुआ।

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