इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान पर फिर गिरा इस्लामिक आतंकी दल तालिबान का कहर.. मार डाले 30 अफगानी सुरक्षाकर्मी

आखिर वो कौन सी सोच है जिसका ध्येय सिर्फ और सिर्फ निर्दोष लोगों की जान लेना होता है, खून बहाना होता है? कभी ये सोच गैर मजहबी धार्मिक स्थलों पर हमला करके निर्दोषों का लहू बहती है लेकिन जब ये सोच ऐसा करने में असफल होती है तो अपने ही इबादतगृह में हमला करती है तथा लोगों की जन लेती है? आखिर ये सोच कहाँ से पैदा होती है जिसे इंसानों की जान लेने में आनंद आता है? ये सोच कभी हिंदुस्तान, कभी अफगानिस्तान, कभी सीरिया, कभी ब्रिटेन, कभी जर्मनी, कभी फ़्रांस तो कभी अमेरिका को बम विस्फोटों से दहला देती है तथा सेकड़ों की संख्या में निर्दोष बच्चों, बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं को मौत के घाट उतार देती है.

मानवता की दुश्मन इसी अक्रान्ताई सोच का एक रूप तालिबान है जिसने इस्लामिक अफगानिस्‍तान में एक बार पुनः तबाही मचाई है. खबर के मुताबिक़ अफगानिस्तान के फराह प्रांत में तालिबान के हमले ने 30 अफगानी पुलिसकर्मियों की जान ले ली है. अफगान अधिकारियों की ओर से इस हमले की पुष्टि की गई है. प्रांतीस सभा के सदस्‍य दादुल्‍ला कानी ने इस घटना की जानकारी दी. उन्‍होंने बताया कि फराह प्रांत खाकी सफेद जिले में पुलिस की आउटपोसट पर यह हमला हुआ. बुधवार देर रात हुए इस हमले में चार घंटे से भी ज्‍यादा समय तक गोलीबारी जारी रही. काबुल में सांसद समीउल्‍ला समीम ने कहा कि जिले के कमांडर अब्‍दुल जब्‍बार की भी इस हमले में मौत हो गई है. तालिबान के आतंकी हमले के बाद भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद लेकर भागने में कामयाब हो गए.

समीम ने बताया तालिबान पर जवाबी कार्रवाई में तालिबान के 17 लड़ाकों को मार गिरा दिया गया. तालिबान ने हाल के कुछ माह में पूरे अफगानिस्‍तान में खतरनाक हमलों को जारी रखा है. इन हमलों में अफगान सुरक्षाबलों के कई सैनिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. तालिबान इस कदर आक्रामक हो गया है कि अथॉरिटीज भी मौत का आंकड़ा देने में असफल रही हैं. बताया जा रहा है कि अब तक 45 अफगान पुलिस कर्मी और सैनिक रोज या तो हमले में मारे जा रहे हैं या फिर घायल हो रहे हैं.

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