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क्यूबेक ने लगाया मुस्लिमों के अधिकारों पर बड़ा प्रतिबन्ध, जबकि अब तक माना जाता था धर्मनिरपेक्षता का केंद्र

जिस तरह से इस्लाम केवल अपने फतवे और कानून में महिलाओ पर हमला करते रहता है। उससे दुनिया को पता चल गया है की इस्लमा महिलाओ को बराबरी का दर्जा नहीं देना चाहता और इसलिए बार बार महिलाओ के ऊपर ही उसके फतवे होते है। भारत भी इनकी हक़ीक़त को समझता है इसीलिए तीन तलाक़ जैसे दकियानूसी कानून पर रोक लगा दिया है और अब हर बड़े देश बुर्खे को लेकर सख्त हो गए हैं।

विदित हो की कनाडा के क्बूयेक प्रांत में विवादित मजहबी तटस्थता क़ानून पारित हो गया है।

इसके तहत सार्वजनिक सेवाएं दे रहे या इन सेवाओं का लाभ ले रहे लोगों के लिए अपना चेहरा दिखाना अनिवार्य होगा। क्यूबेक ने हाल ही में सार्वजनिक यातायात और नगर प्रशासन से जुड़ी सेवाओं को भी इस क़ानून के दायरे में शामिल किया है। क्यूबेक ने इस कानून को बहुमत से पास किया। क्यूबेक की संसद ने विधेयक संख्या 62 को 66-51 वोटों से पारित किया। नकाब या बुर्का पहनने वाली महिलाओं को अब सार्वजनिक सेवाएं देते या लेते हुए अपना चेहरा दिखाना होगा।

जिस तरह से कानून को कड़ा किया गया है बाकी देशों को इससे सबक लेना चाहिए और अपने यहाँ के कानून में इसको शामिल करना चाहिए। अब प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अफ़सरों, शिक्षकों, बस ड्राइवरों, डॉक्टरों जैसे पेशे से जुड़ी महिलाएं अब कार्यस्थल पर बुर्का नहीं पहन सकेंगी। उनको ड्यूटी बिना बुर्खे के करना होगा। 

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