अलग अलग इस्लामिक मुल्क, पर दोनों के पाप एकदम एक जैसे ….ये बाते हो रही पाकिस्तान और बांग्लादेश की

पिछले साल नवंबर में केंद्र सरकार ने नोटबंदी के जरिए पांच सौ और हजार के पुराने करेंसी नोट को बंद कर दिया था। इससे सरकार को जाली करेंसी रोकने में कुछ हद तक मदद भी मिली है। खासतौर पर पाकिस्तान में मौजूद फर्जी नोट छापने वाली फैक्ट्रियों पर नोटबंदी का बड़ा असर पड़ा है। मगर अब दूसरी चुनौती सामने खड़ी है। पाकिस्तान के अलावा पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश भी जाली नोटों को बनाने और उसकी तस्करी का बड़ा अड्डा बनकर सामने उभरा है।

पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश में बने जाली नोट अलग-अलग तरह रास्तों से देश में आते थे। इसमें जम्मू, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्य शामिल हैं। मगर पिछले साल नोटबंदी के बाद इनमें से 11 सीमाई इलाकों में नकली नोट बरामद होने के मामले लगभग न के बराबर ही सामने आए हैं, लेकिन असम और पश्चिम बंगाल में बांग्‍लादेश से सटे सीमाई इलाकों में इस साल की शुरुआत से जाली नोटों की बरामदगी में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

ताजा मामला बांग्लादेश की सीमा से सटे मालदा (पश्चिम बंगाल) का है, जहां से 6.90 लाख रुपए के जाली नोट बरामद किए गए हैं।

मालदा में बीएसएफ के चुरियंतपुर आउट पोस्ट पर जवानों ने 2,000 रुपए के जाली नोट जब्‍त किए हैं। सूत्रों की मानें तो इसके लिए जाली नोटों के सौदागर दो हजार की नई करेंसी छापने के लिए भारत सरकार द्धारा इस्तेमाल किए जा रहे पेपर की तलाश में जुटे हुए हैं। वहीं, बांग्लादेश में बैठे जाली नोटों के सिंडीकेट अब मलेशिया और साउदी अरब से पेपर स्मगलिंग के जरिए इस पेपर को ला रहे हैं। क्योंकि इन देशों से आ रहा पेपर देश में छप रहे नए दो हजार के करेंसी नोट के पेपर से काफी मिलता-जुलता है।

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