होने जा रही बौद्धों की महापंचायत.. श्रीलंका में सेना अलर्ट जिसे शक है म्यांमार जैसे हालातों का

क्या श्रीलंका के बौद्ध म्यांमार के बौद्धों की राह पर चल पड़े हैं ? ये सवाल सिर्फ सवाल नहीं है बल्कि ऐसा होने की प्रबल संभावना नजर आ रही है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं कि बल्कि मजहबी चरमपंथ के खिलाफ श्रीलंकाई बौद्धों के आक्रोश को देखकर ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कहीं श्रीलंका में बौद्ध वही सब न शुरू कर दें जो म्यांमार में बौद्धों ने रोहिंग्या चरमपंथियों के खिलाफ किया था. इसी आशंका को देखते हुए श्रीलंकाई सेना को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है.

खबर के मुताबिक़, रविवार को श्रीलंकाई हाइलैंड शहर कैंडी की वाहनों की लाइन लगी थी व सेना स्टैंडबाय पर थी, क्योंकि ईस्टर वाले दिन लक्जरी होटलों पर इस्लामिक आतंकियों द्वारा किए गए हमलों के बाद से बौद्ध भिक्षु अपनी पहली सभा के लिए एकत्र हुए थे. यह बौद्धों का समूह था, जो मुस्लिमों को देश से निकले जाने की मांग को लेकर इकठ्ठा हुआ था. बौद्ध राष्ट्रवादी समूह बोडू बाला सेना (बीबीएस) के प्रमुख गलगोडा अथेथ ज्ञानसारा ने इस मीटिंग में भाग लेने के लिए देश भर से 10,000 अधिक बौद्ध भिक्षुओं को बुलाया था.

बैठक के बाद समूह ने बोला कि सभा तय करेगी कि इस वर्ष के अंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में कौन जीतकर वापस आएगा. नारंगी रंग के कपड़े पहने ज्ञानसारा ने रविवार को कैंडी में बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिर का दौरा किया. बताया जाता है कि इस मंदिर में बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं. सभा की विज्ञप्ति में बोला गया है कि बाद के दिनों में बौद्ध प्रमुख मुस्लिमों के विरूद्ध कई व रैलियां भी कर सकते हैं. बौद्धों के सबसे बड़े जुटान को देखते हुए सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सेना के प्रवक्ता सुमित अटापट्टू ने कहा, “सेना सुरक्षा कानून के तहत पुलिस की सहायता कर रही है.” 250 से अधिक लोगों की जान लेने वाले बम विस्फोटों के बाद प्रतिशोध रूप में बौद्ध समूहों द्वारा देश में इस्लामिक चरमपंथियों के खिलाफ आक्रोश है.

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