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गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा, पाक का कब्जा गैरकानूनी : ब्रिटिश संसद

लंदन : गिलगिट-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत घोषित करने के पाकिस्तान सरकार के कदम की ब्रिटेन की संसद ने कड़ी निंदा की है। ब्रिटेन ने साफतौर पर कहा है कि पाकिस्‍तान ने इस क्षेत्र पर 1947 के बाद से ही अवैध रूप से कब्‍जा जमा रखा है, जबकि यह कानूनी तौर पर जम्‍मू-कश्‍मीर का अभिन्‍न अंग है। इस संबंध में ब्रिटिश सांसदों ने एक प्रस्ताव भी पास किया है।

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्‍तान ने गिलगित-बाल्टिस्‍तान इलाके पर पिछले 68 सालों से अवैध कब्‍जा जमा रखा है, जो कानूनी तौर पर जम्‍मू-कश्‍मीर का अभिन्‍न अंग है। यह प्रस्ताव गुरुवार को ब्रिटिश संसद में कंजरवेटिव पार्टी के बॉब ब्‍लैकमेन की ओर से पेश किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान कानूनी और संवैधानिक रूप से भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। इस इलाके के लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं, यहां तक कि उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी तक नहीं मिलती है।

प्रस्ताव में साथ ही लिखा गया है कि इस इलाके के जनसंख्या वितरण में किसी भी तरह का बदलाव करना इस विवादित क्षेत्र में तनाव भड़काने जैसा होगा। बता दें कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के चार प्रांत हैं और अब वहां की सरकार इस हिस्से पर अपना पांचवा प्रांत घोषित करने की तैयारी में है। ब्लैकमेन के मुताबिक, यदि पाकिस्‍तान इस फैसले को आगे बढ़ाता है तो इससे इस क्षेत्र की जनसांख्यिकी बदल जाएगी।

इसके साथ ही ब्रिटेन की संसद ने इस क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर यानी सीपीईसी के लिए हो रहे निर्माण को भी अवैध करार दिया है और इसके लिए पाकिस्‍तान सरकार की आलोचना की है। करीब 50 अरब डॉलर के इस आर्थिक कॉरिडोर के जरिए चीन के शीजियांग से ग्‍वादर और बलूचिस्‍तान को जोड़ा जाना है। इसका गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग काफी विरोध कर रहे हैं। बलूचिस्तान में भी इस परियोजना का काफी विरोध हो रहा है।

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