एक और इस्लामिक मुल्क ने अपने देश में सार्वजानिक स्थलों पर बैन किया बुर्का जबकि कुछ सेकुलर देशों में माना जा रहा इसको मजहब पर हमला


ये एक ऐसा आदेश है जो राष्ट्रहित में ले कर किया गया है. इस आदेश में आतंकवाद और अपराध का दमन करने की मंशा है और ये प्रयास किया गया है कि उनके देश का हर नागरिक सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की नजर में उनके मूल रूप में रहे. ये एक ऐसा देश है जहाँ पर लगभग 99 प्रतिशत सुन्नी विचारधारा वाले मुसलमान रहते हैं .. यद्दपि इस जगह पर सरकार की प्रतिबद्धता और अटलता को देख कर इसका विरोध करने की हिम्मत किसी में नहीं हो पाई है और आदेश सख्ती से लागू कर दिया गया है .

ज्ञात हो कि इस्लामिक आतंकी दल ISIS के हमलो और लगातार धमकियों के बाद आखिरकार इस्लामिक मुल्क ट्यूनीशिया ने अपने देश में नागरिको और आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वहां पर सार्वजनिक स्थलों पर बुरका अथवा नकाब को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है.. अब इस आदेश का उल्लंघन करने वाले को कड़ी सजा दी जायेगी जिसमे जेल और जुर्माना दोनों शामिल है , इस फैसले का पूरे ट्यूनीशिया में किसी ने भी अब तक मुखर विरोध नहीं किया जबकि वहां ISIS समर्थको की मौजूदगी बताई जाती है .

इस फैसले के बाद तमाम सेकुलरों देशो में चर्चा शुरू हो गई है कि जो अटलता और दृढ़ता एक इस्लामिक मुल्क दिखा सकता है वही अटलता उनकी सरकारे भी क्यों नहीं दिखा पा रही हैं ? एक आधिकारिक सूत्र ने शुक्रवार को रॉयटर्स को बताया कि ट्यूनीशियाई प्रधान मंत्री यूसुफ चेहेड ने सार्वजनिक संस्थानों में “सुरक्षा कारणों से” नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय ट्यूनीस में मंगलवार के आत्मघाती हमले में वांछित आतंकवादी द्वारा किया गया।


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