सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन में फिर तनाव, अक्साई चीन के बदले तवांग चाहता है चीन

पेइचिंग : दुनिया में भारत को चौतरफा घेरने वाला चीन अब भारत से समझौता करना चाहता है। समझौता भी ऐसा जो भारत के लिए नामुमकिन है। दरअसल, चीन चाहता है कि भारत उसे अरुणाचल का तवांग वाला हिस्सा लौटा दे, तो वो अक्साई चिन पर कब्जा छोड़ सकता है। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब चीन की ओर से इस तरह की ‘पेशकश’ की गई है।

अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध बौद्ध स्थल तवांग के बदले चीन पूर्वी क्षेत्र में ‘लेन-देन’ का ऑफर इससे पहले भी कई बार दे चुका है। 2007 में सीमा विवाद सुलझाने के लिए वर्किंग ग्रुप की घोषणा के ठीक बाद चीन ने यही पेशकश की थी, जिससे पूरी बातचीत खटाई में पड़ गई थी। चीन के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ ने एक इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए।

सीमा विवाद पर भारत से वार्ताकार रहे बिंगुओ ने इशारों में कहा कि विवाद सुलझाने के लिए चीन अरुणाचल प्रदेश में तवांग के बदले अपने कब्जे का एक हिस्सा भारत को दे सकता है। बिंगुओ ने कहा कि अगर भारत पूर्वी सीमा पर चीन की चिंताओं का ख्याल रखता है तो बदले में चीन कहीं ओर भारत की चिंताओं के बारे में जरूर काम करेगा।

दाई बिंगुओ ने कहा कि सीमा को लेकर विवाद अभी तक जारी रहने का बड़ा कारण यह है कि चीन की वाजिब मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया। आपको बता दें कि भारत तवांग पर कोई सौदेबाजी नहीं चाहता, क्योंकि तवांग के इलाके में भारत समर्थक आबादी रहती है और वे कभी भी तिब्बत में नहीं शामिल होना चाहेंगे, इसलिए तवांग को लेकर भारत को कोई सौदेबाजी नहीं करनी होगी।

पश्चिमी सेक्टर में लद्दाख और अक्साई चिन का इलाका है, जिस पर चीन का कब्जा है। अक्साई चिन कश्मीर का हिस्सा रहा है, इसलिए कश्मीर के भारत में विलय के बाद ये इलाका भी भारत का होगा। अक्साई चिन का ये इलाका वीरान और बर्फीला है जिसे लेकर भारत उतना चिंतित नहीं है, लेकिन चीन कहता है कि इसका कुछ हिस्सा वो भारत को दे सकता है।

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