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अमेरिका में गिरफ्तार अल कायदा आतंकी फारुख निकला भारत का निवासी. दुनिया में भारत की महान छवि को आतंकी जैसा पेश करना चाहता है मजहबी कट्टरपंथ

आतंक की जड़ें जब कई नकली खोजकर्ता झारखंड और हरियाणा के गौ रक्षकों में तलाश या स्थपित करने की कोशिश कर रहे थे ठीक उसी समय कही दूर अमेरिका में कोई इस्लामिक आतंकी खून से सनी इबादत लिख रहा था . उसका नाम और पहिचान हटा कर जिहाद समर्थक कुछ मीडिया समूह उस आतंक को परोक्ष रूप से बढ़ावा दे रहे हैं जो पूरी दुनिया में मौत और दहशत का कारक बना हुआ है .

ज्ञात हो की डोनाल्ड ट्रम्प शासित अमेरिका में भारत का रहने वाला याह्या फारुख मुहम्मद खुद स्वीकार कर रहा है की उसने अमेरिका को रक्त रंजित करने का कुत्सित प्रयास किया है और वहां पर आतंक की जड़ें फ़ैलाने के लिए पैसे जुटा कर आतंकियों की मदद की है . भारत से गया फारुख मुहम्मद अल कायदा के दुर्दांत आतंकी अनवर अल अवलाकी को पैसे देने के मामले में दोषी सिद्ध हुआ है . अपने खिलाफ सभी सबूत सामने आने के बाद उस आतंकी ने खुद ही अपना जुर्म कबूल लिया .. अब अमेरिका में उसको 27 वर्ष की जेल हो सकती है वहां के आतंकवाद निरोधक कानून के अनुसार …

यहाँ ध्यान रखना जरूरी है की 39 साल के याहया फारुख ने वर्ष 2008 में एक अमेरिकी लड़की से निकाह रचाया . उसने अपनी बीबी को भी अपने आतंकी मंसूबे जाहिर नहीं होने दिया और अंदर से ही अल कायदा आतंकी अल-अवलाकी के जिहाद का समर्थन खुद भी करना शुरू कर दिया और अपने साथ अपने साथियों को भी अपने साथ अल अवलाकी के जिहाद में शामिल होने की अपील की और इस कार्य को अल्लाह का कार्य बताया था जिसके बाद जन्नत आदि मिलने की बात की थी .. एक बात जो सबसे ज्यादा गौर करने योग्य ये है की पढ़ाई ना होना आतंक का कारण बताने वाले ये जाने लें कि वही अल कायदा आतंकी याहया 2002 से 2004 तक ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग का छात्र रह चुका था जो बाद में संसार के सबसे कुख्यात आतंकी दल अल कायदा का सदस्य बन गया ..

इस मामले में सबसे बुरा पहलू ये है कि 27 साल की सज़ा पूरी होने के बाद अमेरिकी कानूनों के मुताबिक याह्या को अमेरिका से भगा कर वापस भारत भेज दिया जाएगा जिसके बाद खुद आतंकी हमले से जूझते भारत को ऐसे आतंकियों को सहन करना पड़ेगा .. याह्या के साथ पकडे गए अल कायदा के और आतंकियों में उसका भाई इब्राहिम मुहम्मद और दो अमेरिकी नागरिक आसिफ अहमद सलीम व सुल्तान सलीम हैं। आतंकी याह्या 22 जुलाई, 2009 को अपने दो साथियों के साथ अल कायदा के गढ़ यमन गया था और ये तीनों अवलाकी से मिल कर उसे 22 हजार डॉलर (करीब 14 लाख रुपये) देना उद्देश्य था ..

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