जापान के क्योटो से जोड़ा था काशी को, वैसे इजरायल के यरूशलम को अयोध्या से जोड़ सकते हैं मोदी. जाने क्या है समानता दोनों में ?

ये नया इतिहास बनेगा जब भारत का पहला प्रधानमंत्री इजरायल की यात्रा पर जाएगा . अब तक की पूरवर्ती सरकारें विभिन्न कारणों से इजरायल से संबंध रखने से बचती रही थीं जिनमे प्रमुख कारण मुस्लिम वोट बैंक की नाखुशी भी था . 

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा इसी साल प्रस्तावित है अपनी इस यात्रा में श्री मोदी इजरायल के पवित्र शहर येरुशलम को अपनी यात्रा के केंद्र में रख सकते हैं . इजरायल भारत का सदा से सहोगी बनने का इच्छुक रहा है . उसने कई बार अंतराष्ट्रीय मंचो पर भारत का साथ दिया है और भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए तमाम उन्नत और विकसित आयुध भी प्रदान किये हैं . 

येरुशलम यहूदियों का वो पवित्र स्थान है जिसे उन्होंने लड़ कर और बहुत बलिदान के बाद मुस्लिमों से जीता था . इजरायलियों का यरुशलम में आस्था का स्तर जान कर ही डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी इजरायल रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए अपना अमेरिकी कार्यालय इजरायल की राजधानी तेल अवीव से हटा कर येरुशलम में शिफ्ट करने का आश्वाशन दिया था . मोदी भी इजरायलियों की मन की भावना भांप गए हैं और इसलिए वो अपनी यात्रा के केंद्र में इजरायल को रख सकते हैं . मोदी के जाने से पहले वहां की सुरक्षा आदि का पूरा विवरण लेने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल पहले से ही इजरायल की यात्रा कर चुके हैं . 

जापान के क्योटो शहर को काशी से जोड़ने के बाद अब नरेंद्र मोदी का लक्ष्य इजरायल के येरुशलम को भगवान् श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या से जोड़ने की रणनीति हो सकती है . नरेंद्र मोदी को पता है की दोनों तीर्थ स्थलों में एक समानता है . यहाँ मौजूद अल अक्सा मस्जिद को यहूदी अपने देवता सोलोमन का मंदिर तोड़ कर जबरन बनाई मस्जिद मानते हैं और ठीक यही हालत अयोध्या में हैं जहाँ श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर को बाबर ने तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी .जानकारों की राय में  माना जा रहा है की अपनी यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी का वहां की अल अक्सा मस्जिद जाने का कोई इरादा नहीं है .. 

काशी को क्योटो की तरह विकसित करने के कयावद में अब अयोध्या को येरुशलम से जोड़ने के साथ मोदी भारत और इजरायल के मध्य धार्मिक और सांस्कृतिक नजदीदी लाने का प्रयास करेंगे . इजरायल भी पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की अगुवाही करने के लिए बेहद उत्साहित है . इसके बाद दुनिया भर में फैले आतंकवाद का मुकाबला कर रहे इजरायल को भारत के रूप में एक सक्षम और मजबूत साथी मिल सकता है . इजरायल की खुफ़िआ एजेंसी मोसाद को दुनिया की सबसे खतरनाक एजेंसी माना जाता है जो अपने दुश्मनो को किसी भी हाल में मौत देने के लिए जानी जाती है . 

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