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चिढ हो जायेगी ज़िन्ना से जब जानेंगे आप उसके इतिहास के बारे में . आखिर उसकी ही देन है ये बंटा हुआ हिंदुस्तान

पाकिस्तान की जब भी बात होती है तब ही पाकिस्तान को एक आतंकी देश के रूप में देखा जाता है। क्या आप जानते है कि इस आतंकी देश का संस्थापक कौन था। किसने दिया इतिहास के पन्नों में भारत को बंटवारे का दाग ?आइए आज हम आप को बताते है।
मोहम्मद अली जिन्ना ये वो शख्स है जो भारत को उसके इतिहास का सबसे बड़ा घाव दिया । जिसने लाखों लोगों के खून से बंटवारे की लकीर खींची और जन्म दें दिया आतंकी पाकिस्तान को। जिन्ना के जन्म स्थान को लेकर थोड़ा मतभेद है। कुछ लोग जिन्ना का जन्म सिन्ध प्रान्त के कराची के जिले वजीर मेसन को मनते है। तो कुछ लोग जिन्ना का जन्म झर्क को बताते है। तो कुछ लोगों के अनुसार जिन्ना का जन्म 20 अक्टूबर 1875 को हुआ तो कुछ लोगों के अनुसार जिन्ना का जन्म 25 दिसम्बर 1876 को हुआ। ज्यादातर इसी तारीख को जिन्ना की जन्मतिथि मानते है। ये ही वो काला दिन है जिस दिन जिन्ना पैदा हुआ। जिन्ना के पिता जिन्ना भाई पुंजा और उनकी पत्नी मिठी बाई की सात सन्तानों में सबसे बड़े थे. 
जिन्ना के पिता गुजराती व्यापारी थे, परन्तु जिन्ना के जन्म के बाद वो सिन्ध चले गये। सूत्रों के मुताबिक जिन्ना खानदानी गद्दार थे, जिन्ना के पूर्वज हिंदू थे जिन्होने इस्लाम काबूल कर लिया था। जिन्ना ने मदरसा ऊल इस्लाम से पढ़ाई की व बम्बई से मैट्रिक पार कर इंग्लैंड चाले गए जहाँ से उसने वकालत की।  जिन्ना ने बंटवारे के लिए अपनी पूरी जान झोंक दी थी. जिन्ना पाकिस्तान का वजीरे आजम बनना चाहते थे. जिन्ना की पहली पत्नी की मौत किशोरावस्था में ही हो गई थी। 42 साल की उम्र में उन्होंने 18 साल की पारसी लड़की से शादी की थी। हालांकि, लड़की का परिवार इस फैसले के खिलाफ था। दूसरी पत्नी रतनबाई  किशोरावस्था से ही स्मोकिंग करती थीं। वहीं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह पश्चिमी संस्कृति के ट्रांसपेरेंट कपड़े भी पहनती थीं। 
1896 में जिन्ना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गया। तब तक कांग्रेस भारतीय राजनीतिक का सबसे बड़ा संगठन बन चुका था। सामान्य नरमपन्थियों की तरह जिन्ना ने भी उस समय भारत की स्वतन्त्रता के लिये कोई माँग नहीं की, बल्कि वे अंग्रेजों से देश में बेहतर शिक्षा, कानून, उद्योग, रोजगार आदि के बेहतर अवसर की माँग करते रहे। जिन्ना साठ सदस्यीय इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य बन गये। इस परिषद को कोई अधिकार प्राप्त नहीं थे और इसमें कई यूरोपीय और ब्रिटिश सरकार के भक्त शामिल थे। जिन्ना ने बाल विवाह निरोधक कानून, मुस्लिम वक्फ को जायज बनाने और साण्डर्स समिति के गठन के लिए काम किया. जिन्ना ने प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीयों के शामिल होने का समर्थन भी किया और कई लोगों को मरवा दिया था। 
1906 में मुस्लिम लिंग की स्थापना हुई. जिन्ना ने अल्पसंख्यक मुसलमानों को नेतृत्व देने का फैसला कर लिया। 1913 में जिन्ना मुस्लिम लीग में शामिल हो गये और 1916 के लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता की। 1916 के लखनऊ समझौते के कर्ताधर्ता जिन्ना ही थे। यह समझौता लीग और कांग्रेस के बीच हुआ था। 1919 में उन्होंने अपनी एक मात्र सन्तान डीना को जन्म दिया। जिन्ना एक ऐसे नेता था जो भारत के विभाजन और एक नए देश पाकिस्तान की स्थापना के अभियान में सबसे आगे रहा, जिन्ना ने इन शब्दों के जरिए अपने इस कदम को सही साबित करने की कोशिश की थी कि विभाजन होना सही है.
 
यह विभाजन होना ही होगा. हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में, दोनों ही तरफ, लोगों के कुछ धड़े ऐसे हैं जो कि इससे सहमत नहीं होंगे, और न ही इसे पसंद करते होंगे, लेकिन मेरे हिसाब से इसका कोई दूसरा समाधान नहीं हो सकता, और मुझे पूरा यकीन है कि इतिहास हमेशा अपना फैसला इसके पक्ष में ही सुनाएगा.
लैरी कोलिन्स और डॉमिनिक लापियरे ने अपनी किताब फ्रीडम ऐट मिडनाइट में लिखा है कि यदि ‘भारत का सबसे गहरा राज़’ यह की जिन्ना को टीवी था. अगर यह राज पता चल गया होता तो भारत का बंटवारा रोका जा सकता था. मोहम्मद अली जिन्ना टीबी से पीड़ित थे जो कि धीरे-धीरे ही सही पर उन्हें मार रही थी. जिन्ना को पता था कि उसका शरीर अब अंत की तरफ बढ़ रहा है. यदि वह अपना वर्क लोड घटा भी देते हैं, आराम का दायरा बढ़ाते हैं, सिगरेट और शराब छोड़ देते हैं, और अपने शरीर को बाकी राहत भी दे देते हैं तो भी उनके पास एक या दो साल से ज्यादा का वक्त नहीं है. तब जिन्ना को बस देश का बंटवारा करना था. जिन्ना ने यह राज किसी को नहीं बताया. क्युकी इससे बंटवारा रोका जा सकता था.
यदि जिन्ना की बीमारी की खबर बाहर आ गई होती, तो संभावना थी कि जो लोग जिन्ना के पाकिस्तान के विरोध में थे, अपनी सारी गतिविधियों को तब तक रोक देते जब तक कि जिन्ना बहुत बीमार न हो जाते, या वह मर नहीं जाता. जिन्ना की दमदार इच्छाशक्ति के न होने पर उनके समर्थकों को इस बात के लिए मनाना आसान हो जाता कि बंटवारे को रोकना ही ज्यादा सही होगा. जिन्ना यह जानते थे कि यदि उनके हिंदू दुश्मनों को पता चल गया कि वह मौत की तरफ बढ़ रहे हैं, तो सारा राजनीतिक वातावरण बदल जाएगा. वे उनके कब्र में पहुंचने तक का इंतजार करते, फिर मुस्लिम लीग में नीचे के पदों पर मौजूद उनके कमजोर समर्थकों को आसानी से उनके सपने को तार-तार करने के लिए मना लेते. मगर जिन्ना को पाकिस्तान चाहिए था और उससे पाकिस्तान ले लिया और दुनिया को दे दिया आतंकी पाकिस्तान,  और बन गया भारत के इतिहास का सबसे बड़ा खलनायक.
 
 
    
     
     
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