पादरी ने खुद कहा – मैंने किया है 30 बच्चियों से बलात्कार .. वेटिकन चर्च ने कहा – कोई बात नहीं , माफ किया

सनातन ग्रन्थों में एक श्लोक है जो वेदों से लिया गया है —

“अवश्यमेव भोगतव्यम , कृतं कर्म शुभाशुभम”

(पाप क्षमा नहीं होते , अपने किये का दंड हर हाल में भोगना पड़ता है )

इस वैदिक सिद्धांत के बिल्कुल उलट एक मामला तब देखने को मिला जब ईसाईयों की सर्वोच्च प्रार्थना स्थल चर्च वेटिकन सिटी चर्च ने एक चर्च में रहने वाले उस पादरी को माफी दे दी जिसने खुद अपने मुँह से अपने भीषण कुकृत्य को स्वीकार करते हुए 30 बच्चियों से बलात्कार करना स्वीकार किया था और जिस व्याभिचारी आदत के चलते उसे एड्स भी हो चुका था …

मामला है दक्षिण मैक्सिको के ओक्साका का जहां एक चर्च का पादरी जोस गार्सिया अतालफो एक चर्च में बतौर फादर रहता था .. उसने अपने भेद को खुलने से पहले 30 बच्चियों के बलात्कार की बात को खुद कबूला और उसे सब के आगे स्वीकार भी किया ..

पादरी की हवस का शिकार बनी एक बच्ची की माँ ने जब अपनी बलात्कार पीड़िता बच्ची को न्याय दिलाने के लिए पुलिस और न्यायालय का सहारा लिया तो चर्च के भीषण दबाव में कोई साहस नहीं कर पाया उस पादरी पर कार्यवाही करने का , थक हार कर वो दुखी मां सर्वोच्च चर्च वेटिकन सिटी पहुँची पर वहां भी उसे मिली तो सिर्फ और सिर्फ निराशा ..

वेटिकन सिटी में उस बलात्कारी फादर ने दया की भीख मांगी और अपनी बीमारी का हवाला दिया जिस पर चर्च वेटिकन सिटी ने उस बलात्कारी पादरी को क्षमादान देते हुए मुक्त कर दिया और बलात्कार पीड़ित की माँ को न्याय मिलने के सारे सपने तोड़ डाले …

अब वो सारी बलात्कार पीड़िताएं बच्चियाँ और उनके माता पिता पूरी तरह लाचार हैं क्योंकि अब उनके पास इस से आगे अपील करने का कोई स्थान भी नहीं हैं …

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