ये तो मंच पर कहता था कि किसी इंसान में मत डरो पर खुद डर से काँप रहा .बोला – मुझे पुलिस से दूर रखो


कभी बड़े बड़े मंचो पर उसकी महफ़िलें सजती थी . बड़े बड़े राजनेता उसको गले से लगा कर साहब , जी जैसे सम्मानित शब्दों से पुचकारते थे . कभी उसके नाम के साथ धर्म उपदेशक लगाया जाता था फिर अचानक ही सुदर्शन न्यूज ने इसकी असली असलियत दुनिया के आगे खोल कर रख दी और तब से दुनिया और देश दोनों ये जान गया कि ये कोई धर्मोपदेशक नहीं बल्कि एक आतंकी है जिसकी जुबान से केवल जहर निकलता है कोई उपदेश नहीं .

ये बात हो रही है आतंक के आका ज़ाकिर नाइक की जो भररत की सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से डरा सहमा विदेशों में इसलिए छुपा गुम रहा है क्योंकि उसे भी पता है कि वो एक आतंकी है और यहां आने का मतलब सिर्फ और सिर्फ उसके कर्मों की सरकारी सज़ा का हिसाब किताब होना है .इसलिए ज़ाकिर किसी भी हालत में भारत वापस आने को तैयार नहीं है . उसने कहा कि उसको भारत की सुरक्षा एजेंसी और पुलिस पर विश्वास नहीं है .

ज़ाकिर का कहना है कि बेहतर होगा कि उसके ऊपर अंतराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चलाया जाय क्योंकि भारत की पुलिस से उसे डर लगता है . ज़ाकिर कह रहा है कि बेहतर होगा कि NIA उस से मलेशिया आ कर पूछताछ करे .ज़ाकिर आरोप लगा रहा है कि भारत में उसे प्रताड़ना दी जायेगी .उसने कहा कि वो स्काइप और विडिओ कांफ्रेंसिंग के जरिये बयान दर्ज करवाने को तैयार है .

ज़ाकिर जैसे आतंकी अपनी जहरीली सोच को दुष्प्रचारित करते समय एक बार भी उन तमाम माओं , बहनो , बेटियों के बारे में नहीं सोचते जो उस सोच के आदान प्रदान से प्रभावित होते हैं . अफ़सोस ज़ाकिर जैसे आतंकी अपने लिए ज़रा सा भी तकलीफ उठाने के लिए तैयार नहीं है ख़ास कर वो तकलीफ जो उनके खुद के कुकर्मों के कानूनी और संवैधानिक दंड हैं .  


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