चीन में किस कदर हीरों है चंगेज खान ये तब साबित हुआ जब एक व्यक्ति ने कुंचली उसकी तस्वीर अपने पैरों से

अरब और ईरानी इतिहास-लेखकों की नज़र में चंगेज़ एक दानव है, उसे उन्होंने ‘ख़ुदा का क़हर’ कहा है.उसे बड़ा ज़ालिम आदमी बताया गया है.इसमें शक नहीं कि वह बड़ा ज़ालिम था.लेकिन उसके जमाने के दूसरे बहुत से शासकों में और उसमें कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं था. भारत में अफ़ग़ान बादशाह, कुछ छोटे पैमाने पर, इसी तरह के थे.जब ग़ज़नी पर अफ़ग़ानों ने सन् 1150 ई. में क़ब्ज़ा किया तो पुराने ख़ून का बदला लेने के लिए इन लोगों ने उस शहर को लूट और जला तक दिया.सात दिनों तक ‘लूट-मार, बरबादी और मार-काट जारी रही.जो मर्द मिला,

उसे क़त्ल कर दिया गया. तमाम स्त्रियों और बच्चों को क़ैद कर लिया गया.महमूदी बादशाहों (यानी सुल्तान महमूद के वंशजों) के महल और इमारतें, जिनका दुनिया में कोई सानी नहीं था, नष्ट कर दिये गए.’ मुसलमानों का अपने बिरादर मुसलमानों के साथ यह सलूक था.इसके, और यहाँ भारत में जो कुछ अफ़ग़ान बादशाहों ने किया उसके, और मध्य एशिया और ईरान में चंगेज़ की विनाशपूर्ण कार्रवाई के, दरजों में कोई फ़र्क़ नहीं था.चंगेज़ ख़ारज़म ख़ासतौर पर नाराज़ था, क्योंकि शाह ने उस राजदूत को क़त्ल करवा दिया था.

उसके लिए तो यह ख़ूनी झगड़ा था. और जगहों पर भी चंगेज़ ने खूब सत्यानाश किया था, लेकिन उतना नहीं, जितना मध्य एशिया में.शहरों को यों बरबाद करने के पीछे चंगेज़ की एक और भावना भी थी.उसकी ख़ानाबदोशी की तबीयत थी और वह क़स्बों और शहरों से नफ़रत करता था.वह खुले मैदानों में रहना पसंद करता था.एक दफा तो चंगेज़ को ख्याल हुआ कि चीन के तमाम शहर बरबाद कर दिये जाएँ तो अच्छा होगा.लेकिन खुशक़िस्मती कहिये कि उसने ऐसा किया नहीं.

उसका विचार था कि सभ्यता और ख़ानाबदोशी की ज़िन्दगी को मिला दिया जाय, लेकिन न तो यह सम्भव था और न है।हाल में मामला सामने आया की एक चीनी शख़्स को मंगोल शासक चंगेज़ ख़ान की तस्वीर के अपमान के लिए एक साल जेल की सज़ा सुनाई गई है. घटना चीन के स्वायत्त क्षेत्र भीतरी मंगोलिया की है.दोषी की पहचान उनके उपनाम लुओ से की गई है. अदालत के मुताबिक, 19 वर्षीय लुओ ने मई में अपना एक वीडियो बनाया था, जिसमें वह चंगेज़ ख़ान की तस्वीर पर पांव रखे हुए नज़र आ रहे थे.अदालत ने उन्हें नस्लीय नफ़रत फैलाने का दोषी क़रार दिया. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, भीतरी मंगोलिया के स्वायत्त क्षेत्र के ऑरडोस शहर की एक अदालत ने लुओ को नस्लीय नफ़रत और नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देने का दोषी पाया.

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