जो नेपाल बह रहा था वामपंथ की बयार में, अब उसी की जमीन हड़पी चीन ने.. कभी न गुलाम होने वाले नेपाल पर पहली बार ऐसा संकट

नेपाल दुनिया का एक ऐसा मुल्क है जो कभी किसी का गुलाम नहीं हुआ. लेकिन पिछले कुछ दशकों से नेपाल वामपंथ की बयार में बहना शुरू किया तो अब नेपाल के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है. खबर के मुताबिक़, चीन ने नेपाल की 300 किलोमीटर से ज्यादा जमीन हड़प ली है. जिस नेपाल को कोई कभी गुलाम नहीं कर पाया, उस नेपाल की जमीन पर अब चीन कब्जा कर चुका है.

जब नेपाल में मधेसी आन्दोलन हुआ तो भारत ने नेपाल के हित में सख्ती दिखाई क्योंकि भारत जानता था कि नेपाल में जो हो रहा है वो नेपाल की जनता के भविष्य को संकटमय कर देगा. भारत की सख्ती के बीच चीन ने मगरमच्छी आंसू बहाये और नेपाल को दिखाया कि वो ही उसका सबसे बड़ा हमदर्द है. इसके बाद नेपाल नेपाल चीन के पाले में चला गया. भारत के नेपाल की हर तरह से मदद की, आपदा के समय भारत ने भाई की तरह नेपाल की सहायता की लेकिन नेपाल ये सब भूल चीन की ओर मुड़ गया लेकिन अब चीन की सच्चाई जल्द ही नेपाल के सामने आ गयी है.

खबर के मुताबिक़, नेपाल के अधिकारियों ने ओली सरकार को बताया है कि चीन तिब्बत से लगे नेपाल के भू-भाग पर धीरे-धीरे कब्जा कर रहा है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार चीन नेपाल की तीन सौ किलो मीटर जमीन को हड़प चुका है. नेपाल के कृषि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को जो रिपोर्ट भेजी है उसके अनुसार अगर जल्द ही चीन की इस गंदी नीयत का पर्दाफाश नहीं किया तो एक हजार वर्ग  किलोमीटर जमीन चीन के चंगुल में चली जायेगी.

नेपाल के कृषि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को जो रिपोर्ट भेजी है उसके अनुसार बागधारा, करनाली, सनजेनष भुर्जंग, जम्बूखोला केरुंग नदी के किनारे की जमीन के अलावा सिंधुपालचौक, खराने खेलाष भोटेकोशी, शंखूवासभा में चीन ने तिब्बत की ओर से जमीनों को हड़पना शुरू किया है. नेपाल के खुफिया विभाग की आशंका पर जब ये सर्वे कराया गया तो चीन की मंशा सामने आयी है। नेपाल की खुफिया एजेंसियों ने अपनी सरकार को चेताया है कि तिब्बत सीमा से लगे नेपाली भू-भाग के नजदीक ढांचागत विकास के लिए चीन को प्रोत्साहित न किया जाये.

ज्ञात हो कि चीन की कोशिश रहती है कि वो नेपाल को भारत के प्रभाव से दूर कर वहां पर अपना अधिपत्य स्थापित कर ले. इसलिए 2016-17 में चीन ने नेपाल में भारत से मिलने वाली सहायता राशि से 10 गुना ज्यादा मदद देने का प्रस्ताव रखा था. चीन ने नेपाल के एक बड़े हाइड्रोप्रोजेक्ट को भी हड़पने की कोशिश की थी. जैसे ही भारत को इस बात की भनक लगी वैसे ही नेपाल सरकार को आगाह किया और वहां से चीन को बहार किया.

मोदी सरकार के शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हाव-भाव से आभास हुआ है कि भारत और नेपाल के संबंध एक बार फिर से वैसे ही मजबूत होने की दिशा में बढ रहे हैं जैसे मधेसी आंदोलन से पहले थे. क्योंकि नेपाल चीन की चाल समझ चुका है. नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को नेपाल आने का निमंत्रण भी दिया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक मोदी ने ओली का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है, लेकिन यात्रा की तिथि अभी तय नहीं हुई है.

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