रौद्र रुप में आई सेनाएं तो गांधी के सिद्धांतों पर आया चीन. बोला- “चलो वार्ता करते हैं”

चीन ने कहा है कि वह नाथूला पास से होते हुए कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए अन्य रूटों के जरिये वैकल्पिक इंतजामों पर बातचीत कर इसका समाधान निकालने के लिए तैयार है। चीन का कहना है कि वह भारतीय लोगों की धार्मिक भावनाओं के अहमियत को समझता है और सम्मान करता है जिसके चलते कैलाश मानसरोवर की यात्रा को तवज्जो देता है। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा भारत और चीन के बीच लोगों के आपसी संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
दरअसल, 80 के दशक से दोनों देशों के बीच सहमति के चलते जो व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं, उनके तहत चीन ने रहने, आने-जाने और अन्य संबंधित इंतजाम बेहतर करने के लिए काफी प्रयास किए हैं ताकि भारतीय सुरक्षित और आसान ढंग से यात्रा कर पाए। दूतावास की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक, ‘दोनों पक्ष सहमत हुए थे कि 7 बैच में कुल 350 यात्री इस साल नाथूला पास के जरिए यात्रा में हिस्सा लेंगे। विदित हो कि पहले बैच को 20 जून को पहुंचना था। चीनी दूतावास पहले ही वीजा जारी कर चुका है जिसके लिए तैयारियां पूरी हो चुकी है। 
यात्रियों के विदा होने से कुछ दिन पूर्व में भारतीय सैनिक चीनी सीमा में घुस आए थे और डोकलाम में चीनी सैनिकों की सामान्य गतिविधियों में बाधा पहुंचाई थी। चीन ऐसा देश है वह कब रुख बदल दे यह कोई नही जानता। गौरतलब है भारतीय यात्रियों की सुरक्षित एवं आसान यात्रा के लिए चीन ने नाथूला के जरिए उनकी प्रवेश रोक दी थी। चीन ने राजनैतिक माध्यमों के जरिए भारतीय पक्ष को इसकी सूचना भी दी थी। लिपुलेख पास से होते हुए ऑफिशल तरीके से जबकि लहासा और पुरांग के जरिए नॉन ऑफिशियल तरीके से यात्रा चल रही है। आधिकारिक तौर पर करीब 1000 यात्री और 10 हजार यात्री गैरआधिकारिक तरीके से पहुंचते हैं।
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