वो बहुत छोटा सा देश था पर सही समय पर उसने चीन से कहा -” औकात में रहो अपनी, कोई तुम्हारा गुलाम नहीं “

भारत और चीन के बीच चल रहे विवाद से तो सभी वाकिफ है। डोलकाम विवाद हमेशा चर्चा में ही रहा है। भारत का चीन के खिलाफ सख्त रवैया देख अब बाकि

छोटे देशों में भी जोश जागा है। अब चीन के विरुद्ध भारत के साथ साथ अब और देशों ने भी उसके खिलाफ कदम उठा कर चीन को मुँह तोड़ जवाब दिया है। चीन

के दबाब में रह रहे देश अब उसकी बगावत कर रहे है। इससे बड़ी हार चीन के लिए क्या होगी कि उसके खिलाफ अब जो कभी उसके दबे में रहते थे आज वो

उसके विरोध में भारत के साथ जा खड़े हुए है।

चीन अब हर तरफ से शिकस्त खा रहा है। अब उसे लग रहा है कि उसने भारत से दुश्मनी मोल लेकर बहुत बढ़ी गलती कर दी है। अगर अब भी चीन अपनी

हरकतों से बाज नहीं आया तो इस बार उसके वजूद पर खतरा मडरा सकता है। भारत को अपने से कम आंकना चीन की बहुत बड़ी गलतफहमी है। इस बार चीन

के विरुद्ध खड़ी कतार में अब दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना भी आ गया है। चीन के घमंड को एक छोटे से दक्षिण अफ्रीकी देश ने करारा जवाब दिया है।

अपनी हीरों की खानों के लिए मशहूर दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना चीन की बार-बार की धौंस से तंग आकर तब आग बबूला हो उठा है।

बता दें कि चीन बौद्ध धर्म

के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे के लेकर बोत्सवाना को राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था। जिसपर अब

बोत्सवाना ने चुप्पी तोड़ कर राष्ट्रपति इयान खामा ने बातचीत के दौरान इस्तेमाल ना की जाने वाली ऐसे कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया है जिसने चीन को

आइना दिखाने का काम किया है। बोत्सवाना का यह जवाब चीन के मुँह पर किसी तमाचे से कम नहीं है।

एक इंटरव्यू में बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने कहा कि उन्होंने तरह तरह की धमकियां दी, चीन अपना राजदूत वापस बुला लेगा, दोनों देश के बीच रिश्ते

खराब हो जाएंगे, चीन दूसरे अफ्रीकी देशों की मदद से बोत्सवाना को अलग-थलग कर देगा।

भारत को उसके विरुद्ध देख इस बार बोत्सवना चीन के दबाव में नहीं

झुका। बता दें कि तिब्बत पर दलाई लामा के रुख को लेकर चीन उनका विरोध करता रहा है।

दलाई लामा का बोत्सवना पर दौरा रद्द होने की खबर पर राष्ट्रपति ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि उनकी सेहत जल्द ठीक होगी और एक बार तंदुरुस्त होने के

बाद निश्चित रुप से उनका बोत्सवाना में स्वागत है, वे यहां आएं और घुमें।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बोत्सवाना चीन की कॉलोनी नहीं है और अब उन पर

चीन की धमकियों का कोई असर नहीं पड़ेगा। चीन पर बोत्सवाना के राष्ट्रपति का रुख देखकर वहां की मीडिया गदगद है। बोत्सवाना की मीडिया मानती है कि

उनके देश ने संदेश दे दिया है कि वे चीनी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और उनके देश को चीन की जरूरत नहीं है। 

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