13 साल की बच्ची को इसलिए कुचल डाला क्योंकि वो समझा कि वह मुसलमान है.. शुरुआत हो चुकी है धर्मयुद्ध की

एक तरह से टुकड़ों में शुरू हुआ ईसाई-मुस्लिम धर्मयुद्ध अब अपनी विभीषिका की ओर बढ़ता जा रहा है. दुनियाभर से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब इस्लामिक चरमपंथ के विरोध स्वरुप ईसाई समुदाय के लोगों ने धैर्य खोया हो. इसका सबसे ताजा उदहारण था न्यूजीलैंड की मस्जिदों में ईसाई नागरिक द्वारा भयंकर गोलीबारी, जिसमें 51 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा कई ऐसे मामले भी सामने आये हैं जब ईसाइयों ने इस्लामिक चरमपंथ से आक्रोशित होकर मुस्लिमों को गाड़ी से कुचल दिया.. हालाँकि ये तरीका भी सिलामिक आतंकियों का ही ईजाद किया हुआ है.

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ऐसा ही एक मामला अमेरिका के कैलिफोर्निया से सामने आया है जहाँ एक ईसाई व्यक्ति ने एक 13 वर्षीय बच्ची को इसलिए गाड़ी से कुचल दिया, क्योंकि वो समझा था कि बच्ची मुसलमान है. हालाँकि वो बच्ची मुस्लिम नहीं थी बल्कि भारतीय हिन्दू थी. इसके बाद जो हुआ वो और भी चौकाने वाला था. बच्‍ची के इलाज के लिए ऑनलाइन लोगों ने इतना फंड इकट्ठा कर लिया है कि अब उसके माता-पिता को चिंता करने की जरूरत नहीं है. हालांकि अभी यह बच्‍ची कोमा में है और हर कोई इसके लिए प्रार्थना कर रहा है.

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घटना 23 अप्रैल की है और कैलिफोर्निया के सनीवेल की है. यहां पर कक्षा सात में पढ़ने वाली धृति नारायण को उस समय कार से टक्‍कर मार दी गई जब वह अपनी मां और दूसरे फैमिली मेंबर्स के साथ सड़क पार कर रही थी. ड्राइवर ने धृति और उसके साथ मौजूद कुछ और लोगों को सिर्फ इसलिए टक्‍कर मारी क्‍योंकि उसे को लगा कि वह मुसलमान है. धृति को टक्‍कर मारने वाले का नाम आइसाया पीपुल्‍स है और एक एक वॉर वेटरन है. आइसाया इराक वॉर में हिस्‍सा ले चुका है. हमले में धृति के पिता राजेश नारायण और उसका नौ वर्ष का भाई प्रखर भी घायल हो गए.

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धृति इस समय कोमा में है और उसे कई ट्रॉमा और सिर की चोटें आई हैं। धृति के इलाज लिए गोफंडमी पर सात दिन पहले अपील की गई थी। अब तक 12,360 लोग इस पर मासूम धृति के इलाज के लिए डोनेट कर चुके हैं. सोमवार की शाम तक धृति के इलाज के लिए करीब 600,000 डॉलर तक की रकम जुटा ली गई थी. जबकि लक्ष्‍य केवल 500,000 डॉलर ही तय किया गया था.

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