ब्लास्ट और नरसंहार के आरोपी श्रीलंकाई मुसलमानों के लिए अब भारत से उठी पहली आवाज… देवबंद को हुआ दर्द, पर मृतकों के लिए नहीं

श्रीलंका में चर्चों तथा होटलों पर इस्लामिक आतंकियों के भीषण हमलों के बाद श्रीलंकाई सत्ता तथा श्रीलंकाई सुरक्षाबल आतंकी तथा उनके आकाओं के खिलाफ जिस तरह से आक्रामक कार्यवाई कर रहे हैं, उसके खिलाफ हिंदुस्तान से आवाज उठी है. बता दें कि श्रीलंकाई सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने और चेहरा ढकने पर पाबंदी लगा दी है. श्रीलंका सरकार द्वारा मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने और चेहरा ढकने पर पाबंदी लगाने देवबंदी उलेमा भड़क उठे हैं.

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स्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने और चेहरा ढकने पर पाबंदी लगाये जाने का विरोध करते हुए देवबंदी उलेमा ने कहा है कि वहां की हुकूमत एक फिरके को टारगेट कर रही है जो घटिया और छोटी सोच को दर्शाता है. देवबंदी उलेमा का कहना है कि श्रीलंका में हुआ आतंकी हमला निंदनीय है. लेकिन उसके नतीजे में ऐसे कानून बनाना जो किसी मजहबी दस्तूर से टकराते हों, यह सरासर गलत और संयुक्त राष्ट्र संघ के खिलाफ है.

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उलेमाओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर हुए हमले से बुर्के पर पाबंदी लगाना और चेहरा ढकने का कोई ताल्लुक नहीं है. घटना की जांच करना, मुजरिमों को तलाश करके उन्हें सजा देना यह चीजें बेहद जरूरी हैं,  न की उसके नतीजे में किसी एक धर्म के लोगों को निशाना बनाकर इस तरह की कार्रवाई करना. बता दें कि कुछ दिनों पहले हुए हमले के बाद से श्रीलंका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चेहरा ढकने वाली हर चीज जैसे बुर्का और नकाब पर प्रतिबंधलगा दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार ये फैसला राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने लिया है. साथ ही उन्होंने सरकार के इस फैसले की जानकारी ट्विटर पर भी दी है.

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