श्रीलंका में क़त्ल हो रहे हैं बौद्ध लेकिन दुःख का कारण बताया जा रहा क्रिकेट

श्रीलंका में पिछले काफी समय से इस्लामिक चरमपंथियों तथा बौद्धों के बीच हिंसा हो रही है. शुरुआत में म्यामार की तर्ज पर श्रीलंका में इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा बौद्धों का धर्म परिवर्तन किया गया तथा बौद्ध स्मारक तोड़े गये. पिछले कुछ समय से श्रीलंका में बौद्धों की हत्याएं भी की गयी हैं.

जब बौद्धों पर लगातार अत्याचार जारी रहे तब मजबूरन बौद्धों ने भी प्रतिकार किया. श्रीलंका में स्थिति यहाँ तक खराब हो गयी है कि हिंसा रोकने के लिए सरकार को आपातकाल लगाना पड़ा है. हिंसा का सर्वाधिक शिकार श्रीलंका का कैंडी शहर हो रहा है तथा लगातर हत्याएं तथा आगजनी की जा रही है.

इस समय श्रीलंका की आजादी के 70 वर्ष पूर्ण होने की खुशी में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने निदाहस त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज खेलने का फैसला किया था जिसके लिए भारत तथा बंगलादेश की क्रिकेट टीमें श्रीलंका पहुँच चुकी हैं. श्रंखला का पहला मैच भारत तथा श्रीलंका के बेच आज कोलम्बो में खेला जाना है लेकिन आपातकाल के कारण मैच के श्रंखला पर भी खतरे के बदल मंडरा रहे है.

लेकिन यहाँ बात क्रिकेट श्रंखला की नहीं इंसान की जान की है आतंक की है बौद्धों पर हो रही हत्यायों की है. श्रीलंका की सरकार क्रिकेट श्रंखला को सुरक्षा देने को प्रतिबद्ध है लेकिन बौद्धों के कत्लेआम को नहीं रोक सकी तथा अब इमरजेंसी लगानी पड़ी. श्रीलंका सरकार तथा क्रिकेट बोर्ड को समझना होगा कि क्रिकेट से पहले देश को अफगानिस्तान या सरिया होने से बचा लें. क्रिकेट मैच फिर भी होते रहेंगे लेकिन अगर श्रीलंका एक बार इस्लामिक चरमपंथ की चपेट में आ गया तो फिर श्री लंका की क्या हालत होगी ये हर कोई जानता है.

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