इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान में गोलियों से भून डाली गई महिला पत्रकार. उनके काम को घोषित किया गया था “नाकाबिले बर्दाश्त”


आज मदर्स डे अर्थात मातृ दिवस है .. दुनिया भर के धार्मिक देश और सेकुलर मुल्क इस दिन को एक पर्व की तरह मना रहे हैं और माताओं के साथ दुनिया भर की महिलाओं को श्रद्धा से नमन भी कर रहे हैं जो एक सन्तान को जन्म देने से ले कर पालने पोषने तक के बीच में कितनी तकलीफें उठाती है .. लेकिन एक इस्लामिक मुल्क में हुआ कुछ ऐसा जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है और बड़ा सवाल करने योग्य है आतंक के उन पैरोकारों से जो बहाना लेते हैं तथाकथित सेकुलरिज्म का.

विदित हो कि इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान में घर की चारदीवारी से बाहर कदम निकाल कर बदलाव लाने की कोशिश कर रही एक महिला पत्रकार को गोलियों से भून डाला गया है . महिला पत्रकार का नाम मीना है जो एक स्थानीय टी वी चैनल में पत्रकार और एकंर के तौर पर कार्य किया करती थी . मीना के इस काम को पहले से ही इस्लामिक आतंकी समूहों द्वारा नाकाबिले बर्दाश्त करार दिया गया था और उनकी सोशल प्रोफाइल पर उनको कई बार मौत की धमकी भी दी गई थी .

मिल रही जानकारी के अनुसार वो संसद की सांस्कृतिक सलाहकार भी थीं. घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि मोटरसाइकिल पर एक बंदूकधारी ने बाजार में पहले हवा में चार राउंड गोली चलाई। इसके बाद उन्होंने मीना को गोलियों से भून डाला .महिला अधिकार कार्यकर्ता वाजमा फ्रोघ का कहना है कि मीना ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उन्हें लग रहा है कि उनके जीवन को खतरा है। फिलहाल इस मामले में महिला सम्मान और सेकुलरिज्म पर अक्सर बोलने वाले बड़े नाम खामोश दिखाई दे रहे हैं . मीना ने अफगानी   महिलाओं को मुख्य धारा में लाने की तमाम कोशिशें की थी लेकिन अब वो   मात्र एक याद बन कर रह गई हैं .


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