अमेरिका को ऐसा जवाब रूस और चीन भी शायद न दे पाते हों.. सुनिए भारत के विदेश मंत्री की अमेरिका को अमेरिका में नसीहत

शायद ये पहली बार था अजब अमेरिका को अमेरिका में ही बैठकर किसी देश ने ऐसा जवाब दिया हो. जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका को अपने ही अंदाज में जवाब दिया तो अमेरिका के साथ ही दुनिया न सिर्फ चौंक गई, बल्कि जयशंकर के बयान में बदले हुए भारत की ताकतवर छबि की झलक साफ़ ही दिखाई दी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका को जो जवाब दिया है, वैसा जवाब तो शायद रूस तथा चीन भी नहीं दे पाते.

आपको बता दें विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय अमेरिकी दौर पर हैं. अपने अमेरिकी दौरे पर आक्रामक तेवर अपनाते हुए जयशंकर ने अमेरिका को चेता दिया है कि जम्‍मू कश्‍मीर पर किसी भी तरह से तीसरे पक्ष की तरफ ये मध्‍यस्‍थता का ऑफर बिल्‍कुल भी स्‍वीकार नहीं किया जाएगा. उन्‍होंने साफ कर दिया है कि भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय मसलों को सिर्फ दोनों देश ही सुलझा सकते हैं और कई दशकों से इस बार भारत सरकार अडिग है.

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की तरफ से कश्‍मीर मसले पर मध्‍यस्‍थता की पेशकश पर जयशंकर ने सधा हुआ मगर आक्रामक जवाब दिया. उन्‍होंने कहा, ‘भारत पिछले 40 वर्षों से बहुत ही स्‍पष्‍ट है कि किसी भी तरह की मध्‍यस्‍थता को स्‍वीकार नहीं करेगा, साथ ही जो भी चर्चा होनी है वह द्विपक्षीय ही होगी.’ जयशंकर ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे को लेकर अपने दिमाग में बहुत ही स्‍पष्‍ट हूं. मेरा तर्क बहुत सरल है. (यह) किसका मामला है? मेरा, किसे फैसला करना है? मुझे. अगर यह मेरा मामला है और मुझे फैसला करना है, तो मैं तय करूंगा कि मुझे किसी की मध्यस्थता चाहिए या नहीं आप अपनी पसंद से कोई भी प्रस्ताव रख सकते हैं लेकिन यदि मैं फैसला करता हूं कि यह मेरे लिए प्रासंगिक नहीं है तो ऐसा नहीं होगा.’

iइसके साथ ही विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम खरीद पर अमेरिकी आपत्ति पर सिलसिले में भी कड़े शब्दों में जवाब दिया है. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने के लिए स्वतंत्र है. उन्होंने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि कोई देश हमें बताए कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं. हमने हमेशा इस बात को कहा है कि हम क्या सैन्य उपकरण खरीदते हैं, यह हमारा संप्रभु अधिकार है. इसी तरह हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमें अमेरिका से क्या खरीदना है और क्या नहीं.’

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