श्रीलंका के मुसलमान मंत्रियों के इस्तीफे के बाद वहां के दो हिन्दू नेताओं का वो सेक्यूलर रूप दिखा जो भारत में भी नहीं दिखा अब तक

21 अप्रैल को ईसाइयों के त्यौहार ईस्टर पे श्रीलंका के चर्चों तथा हितेलों पर हुए सिलसिलेवार भीषण इस्लामिक आतंकी हमलों के बाद अभी तक वहां का माहौल सामान्य होता हुआ नारा नहीं आ रहा है. न सिर्फ श्रीलंका की सत्ता बल्कि वहां की जनता भी मजहबी चरमपंथ के खिला आक्रोशित है.. खासकर श्रीलंका का बौद्ध समुदाय किसी भी हालात है इस्लामिक चरमपंथ को स्वीकार करने को तैयार नहीं है तथा मुस्लिमों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है.

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बौद्धों के आक्रोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके बाद वहां के सभी नौ मुस्लिम मंत्रियों और दो प्रांतीय गवर्नरों ने इस्तीफा दे दिया है. लेकिन इसकेबाद श्रीलंका के दो मुस्लिम नेताओं ने वो सेक्यूलर रूप दिखाया है, जो शायद अभी तक हिंदुस्तान में भी नहीं देखा गया. खबर के मुताबिक़, श्रीलंकाई सरकार में शामिल मुस्लिम मंत्रियों तथा दो गवरंरों के के इस्तीफे पर वहां के दो हिंदू सांसदों ने कड़ा एतराज जताया है.

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द तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) का कहना है कि मुस्लिम मंत्री भेदभाव के शिकार हो रहे हैं. टीएनए के सांसद एम सुमनतिरन ने कहा, ‘आज ये निशाने पर हैं, कल हम लोग होंगे। सबको साथ रहने की जरूरत है. हम लोग मुसलमानों से मिलकर रहेंगे.’ श्रीलंका के एक अन्य हिंदू नेता मनो गणेशन ने कहा, यदि सरकार बौद्ध संन्यासियों के हिसाब से चलेगी, तो गौतम बुद्ध भी देश को बचा नहीं पाएंगे. दरअसल बौद्ध बहुल श्रीलंका में प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु अथुरालिये रतना इन मंत्रियों के इस्तीफे के लिए आमरण अनशन पर बैठ गए थे, इसके बाद वहां  के 9 मुस्लिम मंत्रियों तथा दो मुस्लिम गवर्नरों ने इस्तीफा दे दिया था.

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