बुर्के का विरोध ईरान में करने वाली महिला को मिली ऐसी सजा कि कांप उठेगी रूह.. खामोश हैं बुद्धिजीवी

हिंदुस्तान के वो तमाम बुद्धिजीवी तथा महिला स्वाभिमान की बात करने वाले वो सभी ठेकेदार मौन हो गये हैं जो किस ऑफ़ लव  जैसा  अभियान भी चला चुके हैं. ईरान की उस वकील तथा जांबाज महिला ने महिलाओं को उनका हक़ दिलाने के  लिए, महिलाओं को गुलामी की जंजीरों से बाहर  निकालने के लिए अभियान चलाया तो उसको ऐसी सजा दी गई है, जिसे जानकर आपकी रूह कांप उठेगी.

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खबर के मुताबिक़, रान की जानी-मानी वकील तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता नसरीन स्‍तेयूदेह को हिजाब और बुर्का के खिलाफ लड़ाई लड़ने और इन्‍हें मानने वाली महिलाओं का पक्ष लेने के लिए 148 कोड़ों और 38 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई है. 55 वर्षीय नसरीन ने उन महिलाओं का पक्ष लिया था जिन्‍होंने सार्वजनिक तौर पर अपने हिजाब को हटा दिया था. नसरीन ने कोर्ट में भी इन महिलाओं का केस लड़ा था. अब नसरीन को 38 वर्ष जेल में गुजारने होंगे तथा उन्हें 148 कोड़े मारे जायेंगे.

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बता दें कि ईरान की कई महिलाएं पिछले दिनों आगे आईं थी और उन्‍होंने अनिवार्य हिजाब या बुर्का को उतार कर फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर पोस्‍ट की थी. ईरान महिलाओं के हिजाब और बुर्का अनिवार्य हैं. कई महिलाओं ने तो इसका वीडियो तक बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था. नसरीन को पिछले वर्ष जून में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद ईरान ने उन पर जासूसी और सुप्रीम ईरानी लीडर के खिलाफ दुष्‍प्रचार फैलान का आरोप लगाया था.

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नसरीन के पिता रेजा खानदान ने इस बात की पुष्टि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर एक ओपेन लेटर लिखकर की है. नसरीन की सजा के खिलाफ दुनियाभर में अभियान चलाया जा रहा है तथा तथा अब तक 119,977 लोग उन्‍हें रिहा करने से जुड़ी याचिका पर साइन कर चुके हैं. लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि म्यांमार, सीरिया, श्रीलंका के मामलों को लेकर चीखने वाले भारत के बुद्धिजीवी ईरानी महिला को न्याय दिलाने के नाम पर मौन हैं.

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