अरब के शेखों की हवस मिटाने के लिए उनका दलाल रहता था भारत में.. उसका नाम है आसिफ

आसिफ जो दलाल था अरब के शेखों का..जो उनकी शारीरिक वासना की पूर्ति के लिए भारत खासकर पूर्वोत्तर की महिलाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर अरब देश भेजता था. पूर्वोत्तर भारत की गरीब परिवार की महिलायें, जिन्हें लालच दिया जाता था अच्छी सैलरी के साथ नौकरी का तथा उनको सौंप दिया जाता था अरब के शेखों के हाथों जहाँ उनका शारीरिक शोषण किया जाता था. पूर्वोत्तर की महिलाओं की तस्करी का खुलासा तब हुआ जब  जब त्रिपुरा की एक महिला भटककर लखनऊ के चारबाग जीआरपी थाने पहुंची तथा आपबीती सुनाई.

आसिफ तथा उसकी गैंग के चंगुल से छूटकर महिला भटककर जीआरपी थाने पहुंची तो उसे आशा ज्योति केंद्र ले जाया गया. केंद्र की  काउंसलर अर्चना सिंह ने उससे पूछताछ की. त्रिपुरा के धर्मानगर निवासी महिला ने बताया कि उसे और सात अन्य महिलाओं को 20 हजार रुपये के वेतन पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर त्रिपुरा से मुंबई ले जाया गया. पर, मुंबई में पांच का ही सऊदी अरब भेजने के लिए जरूरी चिकित्सकीय परीक्षण पास कराया जा सका. इन महिलाओं के परिवारों को कुछ पैसे भेजे गए, फिर एजेंट के जरिये उन्हें सऊदी रवाना कर दिया गया.

महिला ने रूमाना नाम की एक महिला का नाम भी लिया है जो महिलाओं को अपने जाल में फंसाती थी तथा आसिफ उनको अरब भेजता था. महिला ने बताया कि एक महीने पहले बची तीन बची महिलाओं को हैदराबाद ले जाया गया पर वहां गिरोह मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करने में नाकाम रहा. इसपर तीनों को अलग-अलग एजेंटों का नंबर देकर अलग-अलग शहर में भेजा गया. दस दिन पहले लखनऊ पहुंची महिला के मुताबिक उसे कुछ रुपये और चौक निवासी आसिफ नामक एजेंट का मोबाइल नंबर दिया गया था.

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महिला ने बताया कि आसिफ ने ही नाका थानाक्षेत्र के एक होटल में उसकेठहरने का इंतजाम किया था. भाषा की समस्या होने के बारण दोनों के बीच कम ही बातचीत हो रही थी. बृहस्पतिवार रात करीब 10.45 बजे महिला किसी काम से होटल से निकली और रास्ता भटक गई. इसी बीच महिला के परिवारीजनों का कॉल आ गया. परिवारीजनों से बातचीत के दौरान उसने रास्ता भटकने की बात कही. इस पर पुलिस से संपर्क करने को कहा. महिला सीधे चारबाग रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने गई. पुलिस को उसकी भाषा समझ में नहीं आई तो महिला कांस्टेबल के साथ उसे रात में आशा ज्योति केंद्र भेज दिया गया.

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आशा ज्योति केंद्र के कैंटीन संचालक जो बंगला भाषा जानता था, ने महिला से बातचीत की, तब पूरा मामला समझ आया. इसके बाद महिला के परिवारीजनों से बातचीत की गई तथा उनको लखनऊ पहुंचने को कहा गया. रविवार देर शाम को महिला के परिवारीजन लखनऊ पहुंचे. उनका भी बयान दर्ज कराया गया. पीड़िता के भाई ने बताया कि गिरोह की सरगना त्रिपुरा की ही रुमाना है. चार अप्रैल को बहन से बातचीत हुई तो उसके लखनऊ में होने की जानकारी मिली. इसकी जानकारी होने पर गिरोह की सरगना की करीबी एक अन्य महिला ने उसे लखनऊ नहीं आने के लिए धमकाया.

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पूंछताछ में पता चला है कि त्रिपुरा की महिलाओं की तस्करी के लिए मुंबई को केंद्र बनाया गया है. महिला ने बताया कि पूरे देश में इस गिरोह के एजेंट फैले हैं तथा लखनऊ भी इससे अछूता नहीं है. बताया कि रुमाना ने ही आसिफ का मोबाइल नंबर पर्ची पर लिखकर दिया था. आशा ज्योति केंद्र की काउंसलर अर्चना सिंह के मुताबिक, रुमाना ने आसिफ से भले ही महिला को होटल दिलवाया लेकिन उसकी निगरानी के लिए अपने पति को लगा रखा था.

महिला से मिली जानकारी के बाद आरोपी रुमाना को आशा ज्योति केंद्र बुलाया गया पर रुमाना ने खुद को महिला का रिश्तेदार बताया. वह सोमवार को लखनऊ रेलवे स्टेशन पहुंची. यहां से उसने केंद्र को सूचना दिया कि वह रास्ता नहीं जानती है. इस पर केंद्र के कर्मचारी उसे लेने चारबाग पहुंचे. उससे पूछताछ की गई तो वह कई सवालों का जवाब नहीं दे सकी. टीम ने उसके पर्स की तलाशी ली तो उसमें ब्लेड, मुंबई का टिकट, सऊदी अरब की करेंसी बदलने की रसीद, एक चिप मिला. टीम ने आरोपी महिला को भी केंद्र में निगरानी में रखा है.

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अर्चना सिंह ने बताया कि महिला से मिली जानकारी पर रिपोर्ट तैयार कर पुलिस अफसरों को भेज दी है साथ ही डीजीपी ओपी सिंह को मेल किया है. देर शाम वह पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर कृष्णानगर थाने भी पहुंची जहां पीड़िता के परिवारीजनों की तरफ से तहरीर दिलाई गई. वहीं आशा ज्योति केंद्र की पड़ताल की रिपोर्ट की प्रति भी प्रभारी निरीक्षक को सुपुर्द किया. कृष्णानगर  क्षेत्राधिकारी लालप्रताप सिंह ने बताया कि आशा ज्योति केंद्र की काउंसलर ने मामले की जानकारी दी है. इस पर पीड़िता की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर त्रिपुरा की रुमाना, लखनऊ के आसिफ व दो अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपियों की तलाश केलिए प्रभारी निरीक्षक को निर्देश दिया गया है.

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