इस इमरान की जीत को भारत के सेकुलर तत्वों ने भी बताया था कट्टरता की हार.. लेकिन ये तो कर रहा दरिन्दे हाफिज पर उपकार

इमरान खान जब पाकिस्तान का नया प्रधानमन्त्री बना तो जितनी खुशी इमरान व उसके समर्थकों को हुई, उससे ज्यादा खुशी हिन्दुस्तान के तथाकथित सेक्यूलर तत्वों को हुई थी तथा उन्होंने इमरान की जीत को पाकिस्तान में कट्टरता की हार करार दिया. लेकिन इमरान की हकीकत क्या थी, वो अब सामने आ रही है. इमरान खान की सरकार हिंदुस्तान के सबसे बड़े दुश्मन दुर्दांत इस्लामिक आतंकी हाफ़िज़ सईद पर मेहरबान होती नजर आ रही है.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी और 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर पाकिस्तान ने फिर दरियादिली दिखाई है. इमरान सरकार ने हाफिज के संगठन जमात उद-दावा (JuD) और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) को प्रतिबंधित संगठनों की सूची से हटा दिया है. गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने अध्यादेश जारी कर हाफिज के खिलाफ यह ऐक्शन लिया था, लेकिन अब पाकिस्तान की नई हुकूमत उसे आगे बढ़ाना नहीं चाहती है. आपको बता दें कि आतंकवाद पर नरमी की वजह से न केवल पाकिस्तान की साख को बट्टा लगा है बल्कि अमेरिका से मिलने वाली मदद पर भी कैंची चल गई है लेकिन इसके बाद भी इमरान सरकार आतंकियों के साथ खड़ी है.

फरवरी में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने एक अध्यादेश के जरिए आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 में संशोधन किया था। इसके बाद उन आतंकवादियों और संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया गया, जिनका नाम संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की लिस्ट में दर्ज था. JuD और FIF भी इसी अध्यादेश के जरिए प्रतिबंधित किए गए. अब इमरान सरकार ने इस अध्यादेश को आगे नहीं बढाने का फैसला लिया है, इसलिए आतंकी हाफिज के संगठन पर से प्रतिबन्ध हट गया है तथा आतंकी हाफिज अब खुलेआम आतंकी गतिविधियों को संचालित कर सकेगा.

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