सऊदी अरब में भी बन रहे हैं भारत जैसे हालात. महिलाओं ने मजहबी उलेमाओं के खिलाफ फूंका बिगुल

मुस्लिम महिलाओं पर किस तरह से अत्याचार होते है किसी से छुपा नहीं है। हम गहरे पानी में तभी तक रुके होते जब तक की सांस रोकी जा सके और जब सांस फूलने लगे तो हम हवा का रुख करते है। एक कमजोर आदमी तभी तक कमजोर होता है जब तक की वो डरा हुआ हो। एक चिंगारी को पुरे जवलन शील आग में बदलते देर नहीं लगती बस और बस कुछ सेकंड्स के वक्त के साथ ही विस्फोट होता है और कुछ इसी तरह का हो रहा है मुस्लिम महिलाओं के साथ। मुस्लिम धर्म के ठेकेदार महिलाओं को भेड़ बकरी समझते है। महिलाओं को केवल और केवल भोग वस्तु, परदे में रहने वाली प्राणी, मर्दो की जागीर समझते है।

धीरे – धीरे मुस्लिम महिलाओं में विद्रोह और अपने हक़ के लिए आवाजे उठने लगी है। ताजा मामला सऊदी अरब का है। महिलाओं ने एक सुर में आवाज बुलंद करने के बाद धर्मगुरू ने महिलोओं को मेकअप न करने और बूटेदार कपड़े न पहनने की सलाह दी है। सऊदी अरब के प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवी मोहमद अल अराफ़ी ने ‘अबाया’ पर महिलाओं को सलाह दी थी। ट्वीट जारी करते हुए अल अराफ़ी ने लिखा था, “ओ बेटी, ऐसा अबाया मत ख़रीदो जिसमें नक्काशी की गई हो, कट लगे हो, खुला हो या सज़ावट हो…… प्लीज़ बेटी, मेकअप ना दिखाओ…… ऐसा मेकअप न करो जैसा इस्लाम से पहले किया जाता था।”

महिलाओं का रोस तब सामने आया जब धर्मगुरू की सलाह पर सऊदी अरब की कई महिलाओं ने व्यंग्यात्मक सवाल किए और अपना विरोध प्रकट किया। महिलाओं ने अबाया के साथ अपनी तस्वीरें ट्वीट करते हुए धर्मगुरू से पूछा है कि क्या ये पहनना सही है। एक महिला ने अपने कपड़ों की तस्वीर के साथ ट्वीट किया और व्यंगात्मक बोल लिखे, “मेरे अबाया के बारे में आपका क्या ख़्याल है शेख़? अगली बार मैं रंग-बिरंगा, सज़ावटवाला और खुला हुआ अबाया ख़रीदूंगी. ऐसा जो लोग इस्लाम के आने से पहले भी नहीं पहनते थे.” एक और महिला ने ट्वीट जारी किया, “मैं ऐसे ख़ूबसूरत अबाया साझा करना चाहती हूं जो खुले हैं। अल अराफ़ी के ट्वीट को 31 हज़ार से ज़्यादा बार रिट्वीट किया जा चुका है।

Share This Post