एक ऐसा देश जो लगाने जा रहा मस्जिदों पर टैक्स..बोला -“बहुत जरूरी है ये हमारे भविष्य के लिए”


एकतरफ हिंदुस्तान में मस्जिदों को किसी न किसी बहाने से तुष्टीकरण की राजनीति के तहत अनुदान दिया जाता है, मस्जिदों के मौलाना/मौलवियों को बाकायदा सैलरी दी जाती है तो वहीं दुनिया में एक देश ऐसा भी है जो मस्जिदों पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है. ये देश मस्जिदों पर टैक्स इसलिए लगा रहा है ताकि इस्लामिक आतंकवाद पर लगाम लगाई जा सके साथ ही मस्जिद टैक्स लगाने का उद्देश्य इस्लामिक संस्थानों को विदेश मदद या फंडिंग पर निर्भरता को कम करना है.

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आपको बता दें कि मस्जिद टैक्स लगाने की ये तैयारी जर्मनी में चल रही है. आतंकवाद के खिलाफ जर्मनी की संघीय सरकार इसे संभावित कदम के रूप में देख रही है. इसे परोक्ष रूप से आतंकवाद को रोकने व इस्लामिक विचारधारा के प्रभाव से बचने का उपाय माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी में 16 राज्यों ने इस आशय के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति जता दी है. एक अनुमान के अनुसार जर्मनी में 50 लाख से अधिक मुस्लिम रहते हैं. इनमें से अधिकतर तुर्की और अरब देशों से हैं. तुर्की-इस्लामिक यूनियन ऑफ द इंस्टीट्यूट फॉर रिलीजन जर्मनी में 900 मस्जिदों का संचालन करता है. यह संगठन तुर्की के राष्ट्रपति रेसिप तैयप एर्दोगन के अधीन है.

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यहां के मस्जिदों के इमाम को तुर्की की तरफ से पैसे दिए जाते हैं. इससे पहले इस समूह के सदस्य जर्मनी में जासूसी करने को लेकर जांच के दायरे में आए थे. साल 2017 में जब जर्मनी और तुर्की से संबंधों में तनाव बढ़ गया था उस समय जर्मनी के दो मंत्रियों ने कहा था कि एर्दोगन की खतरनाक विचारधारा को कुछ निश्चित मस्जिदों के जरिये जर्मनी में लाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. यहां के कुछ मस्जिद कंट्टरपंथी व इस्लामिक उग्रवादी विचारधारा फैलाने को लेकर जांच के दायरे में आ चुके हैं

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