भारतीय फौज का संदेश है जिसे कर्तव्य मान कर पालन करने की जिम्मेदारी जनता की.. बहिष्कार हो चीनी सामान का

चीन चरो ओर से भारत को घेरने के फ़िराक में है। चीन चालाकी से पड़ोस के हिमालय क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। पाकिस्तान के बाद भारत के लिए अगर कोई खतरा है तो वो चीन हैं। डोकलाम विवाद पर चीन लगातार अकर्मक रुख आपनाये हुए है। उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने मंगलवार को कहा की स्कूल को निशाना बनाकर पाक फौज बहुत निचले स्तर की हद पार कर गई है, भारतीय सेना कभी ऐसा नहीं करती।

ले. जनरल चंद ने कहा कि चीन के रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा ‘अघोषित’ है जिसे कोई नहीं जानता। भारत को मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए अपनी सुरक्षा की चाकचौबंध पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। आर्थिक विकास को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सैन्य क्षमता होना जरूरी है और आने वाले हमलों से निपटने के लिए भी सैन्य छमता होना जरुरी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक छोटा देश और छोटी अर्थव्यवस्था है। इसलिए वह भारत के साथ बड़ी जंग की बजाय पीछे से वार कर युद्ध लड़ रहा है। यह पाकिस्तान के चालक साथी चीन के लिए भी बेहद सुविधाजनक है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने देश को आगाह करते हुए ढाई मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा था।

इस बयान पर जनरल शरत चंद ने कहा  कि उनका आशय ‘युद्ध का उन्माद बढ़ाने के लिए’ नहीं था। उनके कहने का अर्थ था कि भारत को अपनी सुरक्षा पर और ध्यान देने की आवश्यकता है। गौरतबल है की पिछले महीने चीन की सेना ने जनरल रावत के बयान को ‘गैरजिम्मेदाराना’ बताते हुए उनसे युद्ध का शोर मचाना बंद करने को कहा था। भारत से पांच गुनी बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन हमारे पड़ोस के हिमालयी क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इतनी बड़ी सेना होने और दोनों देशों के बीच हिमालय जैसा पहाड़ होने के बावजूद वह आने वाले वर्षों में हमारे लिए खतरा हो सकता है। चीन से सावधान रहने की जरुरत है।

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