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पाकिस्तानी जेल में दम तोड़ गया भारत का मछुवारा भीखाबाई.. नहीं दिया जाता खाने को और बोला जाता था “काफिर”

कुछ देशो में भले ही तथाकथित सेकुलरिज्म के नाम पर वोटबैंक की दुहाई देते हुए आंतकियो तक को अच्छा खाना और अच्छी सुविधाओ की दुहाई दी जाती है लेकिन शायद तथाकथित सेकुलरिज्म और स्वघोषित मानवाधिकार की अंतिम सीमा भारत देश के बॉर्डर ही है . पाकिस्तान और बंगलादेश में जब वहां के मूल निवासी लगातार मारे जा रहे हैं तो जरा उस कैदी की कल्पना कीजिये जो उस देश में एक बंदी के रूप में गया रहा होगा .

ऐसे ही एक बंदी भीमाबाई की पाकिस्तान की जेल में मौत हो गयी . निर्दयी पाकिस्तान ने उनकी लाश तक को उनके घर वालों को देने से आनाकानी की है जिसके चलते सुषमा स्वराज तक से पीड़ित परिवार ने गुहार लगाईं है . ये वही पाकिस्तान है जिसका गुणगान अभी हाल में ही इमरान गैंग दिन रात कर रही थी और उसको शांति और दया का मसीहा बता रही थी . उसी पाकिस्तान का असल रूप अब भीमाबाई की लाश के रूप में सामने आया है जो कराची की जेल में दम तोड़ गया है .

डेढ़ साल पहले समुद्र में मछली पकड़ते जिस भारतीय मछुआरे को पाकिस्तान मरीन सिक्योरटी अपहरण कर ले गई थी, उसकी वहां जेल में मौत हो गई है। परिवार उसके जिंदा वापस लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था, मगर इसी बीच पाकिस्तान की जेल में उसकी मौत हो गयी है . बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की कराची जेल में उसको बुरी तरह से मारा जाता था और कभी कभी दिन भर भूखा रखा जाता था . उसको बीमार होने के बाद दवा तक नहीं दी जाती थी . बाकी कट्टरपंथी कैदी भी उसको काफिर कह कर दूरी बनाते थे और अपने तमाम काम आदि करवाया करते थे . अब पाकिस्तान ने उनकी मौत बीमारी से होना माना है ..

यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान ने मृतक की लाश को भारत देने में आनाकानी दिखानी शुरू कर दी . मृतक का परिवार अब लाश लेने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुहार लगा रहा है . मृतक भीखाभाई बाम्भनिया की उम्र 50 वर्ष थी और वह उना के पालड़ी गांवके रहने वाले थे। ध्यान देने लायक बात यह भी है कि पाकिस्तान की जेल में ही ऊना के कजरडी गांव के मछुआरे की भी मौत कुछ दिनों पहले हुई थी। जिसकी मृतदेह दो महीने बाद वतन पहुंच पाई। ऐसे में भीखाभाई का मृतदेह कब आएगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

 

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