वो पैदा तो हुआ था भारत में पर भारत पर ही बरसाए थे बम.. जानिये कौन था अज़ीम, जो आज चल बसा

जिस मिटटी ने आप को जन्म दिया हो ,

जिन गलियों में आप पले बढे हो .

जिन मैदानों में आप बचपन में खेले हो . 

जिस स्कूल में आप ने पहली पढ़ाई की हो ….

क्या उस पर कोई बम बरसाना तो दूर उसका नुक्सान करना भी सोच सकता है . यदि वो मानवीय सिद्धांतों से बंधा होगा तो निश्चित रूप से उसका उत्तर होगा नहीं , कभी नहीं . पर ऐसा किया था भारत के मुम्बई में ही जन्मे एक मानवीय बन्धनों से बहुत दूर गए अज़ीम दाऊदपोटा जो बाद में पाकिस्तान वायुसेना में एयर मार्शल बन कर 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत में घुस था लड़ाकू विमान ले कर , भारत को तबाह करने की मंशा ले कर . 


1933 में मुम्बई में जन्म हुआ था उसका, फिर 1947 के बंटवारे में वो 14 साल की आयु में वो और उसके परिवार ने पाकिस्तान में जा कर बसने का फैसला किया . 14 वर्ष की आयु में ही उसे अपनी ही जन्मभूमि से चिढ सी हो गयी थी . वो अपने माता पिता से ज्यादा उतावला था पाकिस्तान में दाखिल होने के लिए . इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान में पहुचते ही उसकी एक इस्लामिक राष्ट्र के लिए राष्ट्रभक्ति अचानक जाग गयी और उसने नौकरी का वो मार्ग चुना जिस से वो एक गैर इस्लामिक राष्ट्र भारत को खत्म कर सकता था .


उसने पाकिस्तानी फ़ौज में नौकरी करने का निर्णय लिया . बिलकुल नई उम्र में उसे नौकरी भी मिल गयी . कुछ प्रक्रियाओं के बाद अज़ीम पाकिस्तानी वायुसेना में अधिकारी बन गया . अपनी वर्दी पर वो फूला नहीं समा रहा था . उसकी इच्छा बेहद प्रबल हो चुकी थी अपनी जन्मभूमि भारत से 2 – 2 हाथ करने की और उसे ये मौका सन 1965 में मिल ही गया . 10 साल की नौकरी का अनुभव और भारत के खिलाफ मन में बेहद जहर को पाकिस्तानी हुक्मरानों ने भांप लिया था और उसका यही जहर उसे भारत के खिलाफ पाकिस्तानी वायुसेना की कमान दिला गया .


पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी बताते हैं कि अज़ीम अपनी जन्मभूमि भारत के खिलाफ बेहद बहादुरी से लड़ा था . उसे ढेर सारे मेडल भी मिले थे उस जंग के बाद .. शायद उसने अपनी जन्मभूमि को अपने स्तर से तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी रही होगी. उसने यकीनन भारतीय फौजियों को बेरहमी से मारा रहा होगा तभी उसे ढेर सारे मेडल भी मिले थे . 


वही अज़ीम जो जन्मा तो भारत में था आज पाकिस्तान में सुपुर्द ए ख़ाक हो गया . पाकिस्तान वाले उसकी मौत का खूब प्रचार भी कर रहे हैं , शायद इस उम्मीद से कि उन्हें कोई दूसरा अज़ीम मिल जाए वो भारत में जन्म कर भारत की ही मिटटी से इतनी ही नफरत करता हो जितना अज़ीम करता था .. 

Share This Post