इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया दे रहा ड्रग “तस्करों” को मौत की सजा. पर कहीं गौ “तस्करों” को मिल रही शाबाशी

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति विडोडो ने ड्रग तस्करों को गोली मार देने के आदेश दिए हैं. उन्होंने यह फैसला देश में बढ़ रही ड्रग तस्करी से हो रहे नुक्सान को देख कर लिया हैं. जिसकी उन्हें दूसरे देशो से आलोचना भी सहनी पढ़ रही हैं. जहाँ एक देश ड्रग तस्करों को गोली मार देने के आदेश दें रहा हैं, वहीं भारत में एक आतंकवादी को फांसी देने के लिए भी सरकार को एक तथाकथित गैंग की आलोचनाओं का सामना करना पड़ता हैं।

वो भी उन लोगों से जो भारत में ही रह रहे है। हैरानी होती हैं यह देखकर जिस आतंकी ने नजाने कितने मासूम लोगों की जान ली हैं उसके लिए कुछ नेताओं द्वारा समर्थन किया जाता हैं। जब किसी महिला के साथ कुकर्म किया जाता हैं और उसके गुनाहगारों को सजा दी जाती हैं तो कुछ ह्यूमन राइट्स वाले उन अपराधियों की भिख मांगने आ जाते हैं। अनेक ह्यूमन राइट्स वालों का काम होता हैं किसी बेगुनाह को बचाना न की किसी अपराधी को ठीक वैसे ही जैसे कभी किसी जवान के बलिदान पर मुआवजा ना बढाने की बात करने वाले कुछ तथाकथित ह्यूमन राईट वालों ने पत्थरबाज के लिए १० लाख रूपये मांगे थे .
आज भारत फिर से सही राह पर जा रहा हैं लेकिन कुछ नेताओं का मानना है की भारत का विनाश हो रहा हैं। भारत में देशद्रोहियो को, आतंकियों को उनके करतूतो की सजा मिल रही हैं तो उससे भारत का विनाश हो रहा हैं ऐसा कुछ नेताओं का मनना हैं। ताज्जुब होता हैं कि जिन लोगों की वजह से हमारे देश में खून बहा, जिन आतंकियों ने बेगुनाहो की जान ली, जिन देशद्रोहियो के कारण देश में मातम का माहौल छाया रहा। जब उन्हें सजा सुनाई जाती हैं तो विपक्ष नेताओ को बुरा क्यों लगता हैं? क्यों उन्हें रोना आता हैं? और अगर उन्हें इतना बुरा लगता हैं आतंकियों के मारे जाने से तो वो कैसे कह सकते हैं की उन्हें भारत की जनता से प्यार हैं वह देख नहीं सकते भारतीयों को दुःख में?  
तस्करी एक अपराध है , चाहे वो ड्रग की हो या गौ की .. यदि इस्लामिक मुल्क ही इस अपराध की सजा मौत मानता है तो कोई अन्य इस्लामिक संगठन किसी और तस्करी के लिए खुद को पाक साफ़ कैसे साबित कर सकता है ? 
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